मेरी प्रकाशित पुस्तकें :-
Monday, July 29, 2019
Tuesday, July 23, 2019
गढ़वाली रचना - जिन्दगी ( संदीप रावत ,न्यू डांग श्रीनगर गढ़वाल)
" जिन्दगी "
भैर -भितर आन्दा-जान्दा
सांस छ जिन्दगी
चार दु:ख चार सुख
संग्ति आस जिन्दगी
मुठ्ठयों पर थूक लगैकि
अटगदी रान्द जिन्दगी
झूठी गाणि स्याण्यों मा
भटगदी रान्द जिन्दगी
खैंची ताणि लगीं रान्द
हरदि नि छ जिन्दगी
माटी बणी माटि मा हि
मिली जान्द जिन्दगी |
© संदीप रावत ,न्यू डांग ,श्रीनगर गढ़वाल |
( 'एक लपाग ' पुस्तक से )
Thursday, July 4, 2019
गढ़वाली साहित्य,गढ़वाली कविता - विकास © संदीप रावत ,न्यू डांग ,श्रीनगर गढ़वाल |
* विकास *
बल !
बड़ा- बड़ा प्वटगा वळा
गरीबूं का हिस्सा मा बि
अपणू हिस्सा छन खुज्याणा ,
अर !
विकास का नौ पर
छूड़ी गलत काम तैं बि
सही छन बताणा |
द बोला !
स्यू सब्या -सब्बि
तै विकास तैं कांधिम धैरिक
झणि कख होला दनकाणा ?
अर !
अपणा कर्मों का
डूण्डा हथ्यूं तैं
झणि कख होला लुकाणा ?
© संदीप रावत ,न्यू डांग ,श्रीनगर गढ़वाल |