मेरी प्रकाशित पुस्तकें :-


(1) एक लपाग ( गढ़वाली कविता-गीत संग्रह)- समय साक्ष्य, (2) गढ़वाळि भाषा अर साहित्य कि विकास जात्रा (गढ़वाली भाषा साहित्य का ऐतिहासिक क्रम )-संदर्भ एवं शोधपरक पुस्तक - विन्सर प्रकाशन, (3) लोक का बाना (गढ़वाली आलेख संग्रह )- समय साक्ष्य, (4) उदरोळ ( गढ़वाली कथा संग्रह )- उत्कर्ष प्रकाशन ,मेरठ


Wednesday, May 26, 2021

" गढ़वाळि लिख्वार संदीप रावत दगड़ा सुशील पोखरियाल जी कि छ्वीं - बत्थ "

"साहित्यकार संदीप रावत जी दगड़ा सुशील पोखरियाल जी कि छ्वीं - बत्थ"
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सु.पु. --  गढ़वळि साहित्य जात्रा की सुर्वात आपल कब कर कन करि ?
सं.रा. --  बाळपन बटि गढ़वाळि गीत भला लगदा छायि, पुराणा - पुराणा गीत लगांदु छायि अर कबि - कबि त अपणा आप गीत मिसाणै कोसिस बि कर्दु छायि। जब मि दर्जा 8 मा रै होलु त मिन एक गीत लिखी छौ - " कन लोग रैना वो जो मातमा छायि, तपस्या कैरिक बि वो दुनियाम नि रायि। एक दिन हमुन बि दुनिया से चली जाण, धन - दौलत सब कुछ यखि छोड़ि जाण।" इन इन्नि कैरिक सुर्वात ह्वे। गढ़वाळि गद्य मा लिखणौ सुर्वात आदरणीय विमल नेगी जी का सम्पादन मा पौड़ी बटि छप्येण वळा गढ़वाळि साप्ताहिक समाचार पत्र 'उत्तराखंड खबरसार' अर आदरणीय ईश्वरी प्रसाद उनियाल जी का सम्पादन मा छप्येण वळा गढ़वाळि साप्ताहिक समाचार पत्र 'रंत रैबार' से 2009 का वार ध्वार ह्वे। जादातर लेख मेरा गढ़वाळि भाषा साहित्य सम्बन्धी होन्दा छायि।
सु.पु.--  आपल बाळपन की बात करि त इन बथावा कि आपौ प्रारम्भिक शिक्षा कख ह्वे अर उबारि प्राथमिक विद्यालयों को सजबिज कन छाइ ?
सं.रा.--  मिन आधारिक विद्यालय बटि दर्जा पांच पास करि। दर्जा दस तक मेरी पढ़ै-लिखै वेदीखाल मा हि ह्वे। दर्जा 2-3 बटि कापी, पेंसिल .... गुरजि लोगूं मार बि खांदा छायि। उठ - बैठ, पाणि सरणु, लखड़ा ल्याणु सब्बि धाणि होंदु छौ। प्राइमरी बटि हि भारि रौंस रांदि छै कि कब आलो पंदरा अगस्त अर छब्बीस जनवरी। कब लगौंलु मि गीत।
सु.पु.--  पाटी- ब्वळख्या बटि आज हम कंप्यूटर का युग मा एग्यों। बाळपन मा गीत लगाणै रौंस अर लगन बटि सुर्वात करि आज आप एक प्रतिष्ठित साहित्यकार छन। ईं साहित्यिक जात्रा मा आपल कै उकाळ - उंदार बि बोकि ह्वेली। कुछ वांका बारा मा .....
सं.रा.--  साधुवाद आपतैं। पर मि क्वी प्रतिष्ठित साहित्यकार नि छौं। अब्बि सिखणू, बिंगणू अर गुणणै कोसिस कनू छौं। सब्या वरिष्ठ अर अग्रज साहित्यकारों से भौत कुछ सिखणौ मिलि। कतगौं न अड्योणै कोसिस बि कैरी। कतगै दौं ज्यू - पराण खट्टो बि ह्वे, पर जात्रा जारी रै। लेखन अर रचनौ मा परिपक्वता त पढ़ण - लिखण से ही आंद।
सु.पु.--  कतगा इ वरिष्ठ लिख्वार ब्वलदन कि गढ़वाली भाषा मा किताब त भौत छपेणी छन पर गुणवत्ता कम च। अर कुछ ब्वलदन कि चलो ल्यखणा त छैं छन। आप क्य स्वचदन ?
स.रा.--  सब्यूं का अपणा - अपणा मत छन। अब्बि संग्ति लिख्येणू भौत जरूरी छ, गद्य अर पद्य द्विया विधाओं मा। बाद मा बगत का दगड़ि छंटणी अपणा आप ह्वे जाली। अब्बि 80 - 85% लिख्वार कविता पर ही पिलच्यां छन। नै छ्वाळि को रुझान गद्य की तर्फां कम च।
सु.पु.--  उत्तराखंड मा अर वांसे भैर बि अनेक संस्था कवि सम्मेलन अर गीत - संगीत का कार्यक्रम उर्याणी छन। यांका बावजूद बि शहरों अर गौं का कस्बा - बाजारों मा नै छ्वाळि गढ़वळि मा बच्याण से परहेज़ कनी च। क्य बात ह्वेली ?
सं.रा.--  संस्था अपणि - अपणि तर्फां बटि काम त कनीं छन, पर बाजि - बाजि दौं त खानापूर्ति सि बि नजर आंद। जब तक धरातल परै काम नि करे जालु; आम लोग अपणि मातृभाषा का प्रति हीन भावना नि छ्वाड़ला; भाषा रोजगार से नि ज्वड़े जालि, तब तलक चुनौती त छैंयी छन। कै बि भाषौ व्यावहारिक पक्ष महत्वपूर्ण होंद। भाषा की भल्यार अर संवर्द्धन का वास्ता ब्वलदरा, बिंगदरा, लिखदरा अर पढ़दरा बि चैंणा छन।
सु.पु.--  रावत जी, आप लगातार लेखन से  गढ़वळि साहित्य भण्डार की जै बिरदि कना छौ। अबि तलक आपकि पांच पोथि प्रकाशित ह्वेगिन। कुछ वूंका बारा मा बि प्रकाश डाला।
सं.रा.--  मेरि पैलि गढ़वाळि पुस्तक 'एक लपाग' कविता - गीत संग्रै का रूप मा सन् 2013 मा छप्ये। फिर मिन 192 पेज की एक गढ़वाळि गद्य की पुस्तक 'गढ़वाळि भाषा अर साहित्य कि विकास जात्रा' लेखि, ज्वा सन् 2014 मा प्रकाशित ह्वे। ईं किताब मा समग्र रूप से गढ़वाली भाषा मा गद्य - पद्य, सब्बि विधाओं जनकि भाषा - विज्ञान, अनुवाद, काव्य, कथा, व्यंग्य, निबंध, नाटक, उपन्यास, व्यंग्य चित्र, चिट्ठी पतरि, समालोचना, गढ़वाळि समाचार पत्र - पत्रिकौं कु इतिहास इकबटोळ करने कोसिस कर्यीं छ। 
सन् 2016 मा 'लोक का बाना' (गढ़वाली आलेख संग्रह) प्रकाशित ह्वे। जै मा लोक संस्कृति सम्बन्धी आलेख छन। मेरी चौथि गढ़वाळि पोथि 'उदरोळ' (गढ़वाली कथा संग्रह) सन् ,2017 मा छप्ये। जैमा लोक समाज की छ्वट्टि - छ्वट्टि 34 गढ़वाळि कथा छन। अर पांचवीं किताब 'तू हिटदि जा' (गढ़वाली गीत संग्रै) 2019 मा प्रकाशित ह्वे।
सु.पु.-- गढ़वळि भाषा का आप एक कर्मठ अर सक्रिय लिख्वार छन। आशा कर्दौं कि अगनै बि गढ़वळि साहित्य भंडार मा अग्याळ देणा रैल्या। अब एक आम शिकैत लिख्वारों की या बि रैंद कि अपणि गैड़ि पैंसा खर्च करि किताब छपवाओ, फिर सप्रेम भेंट कारों। वांका बावजूद बि लोग नि पढ़दा। किताब बिकणि नि छन। क्य ब्वन च्हेल्या ?
सं.रा.--  कतगै दौं इन द्यखण अर सुणणा मा बि आयि कि गढ़वळि भाषा का लिख्वार हि एक हैंका लिख्यूं नि पढ़णा छन; आम पाठक त भौत दूरै छ्वीं‌ छन। गढ़वळि साहित्य की वितरण व्यवस्था बि अबि ठिक ढंग से नि ह्वे सकणी छ। लिख्वारों का घर मा हि चट्टा लग्यां‌ छन अपणि किताब्यूं का। कुछ - कुछ जगा मेळा - थौळों, साहित्यिक कार्यक्रमों मा गढ़वाळि साहित्य का स्टाल लगणा छन, य एक अनुकरणीय पहल छ। पर आज यांसे बि बढिक काम कन्नै जर्वत छ। सब्बि सम्पादक, प्रकाशक अर लिख्वार आपस मा मिलिक तैं क्वी कारगर योजना बणै सक्दन। , जांसे गढ़वाळि साहित्यौ प्रचार - प्रसार हो अर आम लोगूं की पौंच मा बि किताब होवुन।
सु.पु.--  गढ़वळि भाषा का प्रचार - प्रसार मा सोशल मीडिया की भूमिका का बारा मा आप क्य स्वचदन ?
सं.रा.--  भाषा का प्रचार - प्रसार मा सोशल मीडिया आज बड़ी भूमिका निभौणू छ। स्थापित साहित्यकारों का दगड़ा - दगड़ नया लिख्वारों का वास्ता बि यो एक अच्छो अर बड़ो मंच साबित होणू छ। लोग यूट्यूब अर फेसबुक मा कविता - गीतों का वीडियो द्यखणा छन, चर्चा - परिचर्चा, कवि सम्मेलन मा साहित्यकारों तैं लाइव द्यखणा छन। अमेजन, फ्लिपकार्ट, गूगल, ई बुक पर गढ़वाळि किताब बि मिलि जाणी छन। गूगल पर एक क्लिक का माध्यम से कतगै साहित्यकार अर वूंको काम समणि ए जांद।
सु.पु.-- गढ़वळि भाषा का नै लिख्वारु तैं आप क्य रैबार दींण च्हेल्या ?
सं.रा.--  नै छ्वाळि का जादातर लिखदरा बस लिखण परैं हि लग्यां छन, पढ़णा कम छन। रचनौं मा मीनत जरूरी छ, मौलिकता जरूरी छ। नै - नै विषयों पर बि लिखणै कोसिस कन्न चैंद। शार्टकट अर नकल से बचण प्वाड़लो। पद्य का दगड़ा गद्य परैं बि नै लिख्वारौं तैं ध्यान द्येण चैंद।
                ******************
                                   ...सुशील पोखरियाल।
         (रंत रैबार,अंक 24 मई 2021मा प्रकाशित )

Tuesday, May 25, 2021

श्रीनगर गढ़वाल /25 मई 2021/ "उत्तराखंड की एक और महान विभूति एवं प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ शिवप्रसाद नैथानी जी हुए दिवंगत "

श्रीनगर गढ़वाल /25 मई 2020/ बहुत ही दुःखद / "उत्तराखंड की एक और महान विभूति एवं प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ शिवप्रसाद नैथानी जी हुए दिवंगत "
😭अश्रुपूरित श्रद्धांजलि😭🙏🙏
       श्रीनगर निवासी, उत्तराखंड के प्रसिद्ध इतिहासकार, उत्तराखंड की संस्कृति पर वृहद लेखन करने वाली उत्तराखंड की महान विभूति परम आदरणीय डॉ. शिव प्रसाद नैथानी जी ( लगभग 88 वर्षीय) का आज देहावसान हो गया। यह उत्तराखंड के लिए एक अपूर्णीय क्षति है। डॉ.शिव प्रसाद नैथानी जी के निधन से हम सभी ने यहाँ के सांस्कृतिक इतिहास के एक अमूल्य रत्न को खो दिया है। अभी हाल ही में हे. न. ब. गढ़वाल केंद्रीय विश्व विद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल में कार्यरत उनके पुत्र डॉ. मोहन नैथानी जी भी अचानक दिवंगत हुए थे । अपने पुत्र की असमय मृत्यु की असहनीय पीड़ा एवं अपनी शारीरिक अस्वस्थता के कारण यह महान विभूति भी हम सभी को छोड़कर गोलोकवासी हो गई।   डॉ.शिव प्रसाद नैथानी जी पौड़ी गढ़वाल के बिलखेत गाँव के मूल निवासी थे एवं गढ़वाल विश्व विद्यालय श्रीनगर गढ़वाल परिसर से इतिहास के अवकाश प्राप्त प्राध्यापक थे।
       परम आदरणीय डॉ.शिव प्रसाद नैथानी जी ने उत्तराखंड के सांस्कृतिक इतिहास सम्बंधी लगभग 12 शोधपरक पुस्तकें लिखकर लेखन के द्वारा उत्तराखंड में अपना अतुलनीय योगदान दिया है।साथ ही उनके विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं में अनगिनत शोधपरक आलेख प्रकाशित हुए। काफी समय तक उन्होंने 'श्रीनगर बैकुंठ चतुर्दशी मेला स्मारिका ' के प्रधान सम्पादकत्व के दायित्व का भी बखूबी निर्वहन किया।
    कई बार  मेरी उनसे  फोन पर भी बातें होती थीं एवं इतिहास, यहाँ की संस्कृति पर भी चर्चा होती थीं । अभी भी गहन अध्ययन , कठिन परिश्रम, लेखन एवं शोधपरक कार्य के प्रति परम आदरणीय डॉ. शिव प्रसाद नैथानी जी की ऊर्जा एवं उत्साह प्रेरित कर जाता था , एक नई ऊर्जा का संचार कर जाता था। उनकी जिंदादिली, सहज -सरल, मृदु एवं सौम्य स्वाभाव से बहुत प्रेरणा मिलती थी । परम आदरणीय डॉ. शिव प्रसाद नैथानी जी को उनके आवास पर अपनी पुस्तकें भेंट करने के दौरान भी उनका सानिध्य मिला और उनका आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
        दिसंबर 2016 में "आखर " समिति के गठन के समय भी जब उनसे बातें हुईं तो उनके संरक्षक मण्डल में शामिल होने से "आखर " को भी आशीर्वाद मिला एवं "आखर "गौरवान्वित हुआ । "आखर " समिति द्वारा गढ़वाली लोक साहित्य के मूर्धन्य विद्वान डाॅ. गोविंद चातक की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम एवं प्रथम "डाॅ. गोविंद चातक आखर साहित्य सम्मान"(वर्ष -2018) समारोह में इतिहासविद् डाॅ. शिव प्रसाद नैथानी जी ने ही अध्यक्षता की थी।
 
     उत्तराखंड के पौराणिक तीर्थों एवं ऐतिहासिक स्थलों एवं प्राचीन से लेकर आधुनिक संस्कृति का उन्होंने प्रमाणिकता के साथ गहन विवेचना की । वास्तव में यहाँ के इतिहास एवं प्राचीन संस्कृति संबंधी जानकारी हेतु सन्दर्भ ग्रन्थ के रूप में डॉ.शिव प्रसाद नैथानी जी की पुस्तकों का अवलोकन सभी के लिए उपयोगी एवं प्रामाणिक सिद्ध होता है। उत्तराखण्ड के इतिहास एवं यहाँ की प्राचीन संस्कृति को लेकर डॉ. शिव प्रसाद नैथानी द्वारा किया गया कार्य उनको सदैव चिरस्मरणीय बनाए रखेगा।
     उनकी  कुछ  शोधपरक पुस्तके --

उत्तराखंड का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भूगोल
गढ़वाल के संस्कृत अभिलेख
उत्तराखंड: संस्कृत, तीर्थ और मंदिर
गढ़वाल के प्रमुख तीर्थ और मंदिर
उत्तराखंड: श्रीक्षेत्र , श्रीनगर
ब्रह्मपुर और सातवीं सदी का उत्तराखंड
उत्तराखंड का सांस्कृतिक इतिहास भाग१
उत्तराखंड गढ़वाल का जनजीवन भाग १
उत्तराखंड गढ़वाल का जनजीवन भाग २
उत्तराखंड का सांस्कृतिक इतिहास...
     
उत्तराखंड की इस महान विभूति के दिवंगत होने पर उनको शत -शत नमन के साथ 'आखर ' की ओर से अश्रुपूरित विनम्र श्रद्धांजलि।🙏 ईश्वर उनकी आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दे एवं शोकाकुल परिवार को यह असहनीय दुःख को सहने की शक्ति दे।
😭कनक्वै लिखण कविता अबारि, कनक्वै क्वी गीत
 वो सुरक-सुरक छोड़ि जाणा, छै जौं दगड़ी प्रीत।😭
😭 ॐ शांति शांति।🙏🙏
                                   संदीप रावत
                                अध्यक्ष - 'आखर ' 
                           न्यू डांग ,श्रीनगर गढ़वाल।





Saturday, May 8, 2021

"शिक्षक, शोधार्थी, शिक्षा का क्षेत्र मा नया -नया प्रयोग कन्न वळा, लेखक अर " हारा हुआ राम " पुस्तक का रचयिता श्री विश्वबंधु चंदाेला जी अब नि रैनि।"

 "शिक्षक, शोधार्थी, शिक्षा का क्षेत्र मा नया -नया प्रयोग कन्न वळा, लेखक अर " हारा हुआ राम " पुस्तक का रचयिता श्री विश्वबंधु चंदाेला जी अब नि रैनि।"

09 मई 2021(श्रीनगर गढ़वाल )-
       दगड्यो प्रणाम 🙏अब त बिल्कुल कखि बि मन नि लगणु कखि बि। दुःख भरी खबर ही सुणणाै मिलणी छन ।माफि चांदु 😭😭🙏🙏एक दुखद खबर छ कि - डॉ0 विश्वबंधु चंदोला जी जो कि 'आखर ' कि सदस्य, शिक्षिका अर कवयित्री श्रीमती सरिता चंदोला जी का हसबैंड अर कवयित्री श्रीमती उमा घिल्डियाल जी का भुला छायि,भग्यान ह्वे ग्येनि । मि तैं ब्याळी 
ब्याखुणी कै वाट्सप्प ग्रुप से पता चली कि वूं को परसि 07मई 2021 खुणी स्वर्गवास ह्वे गे अर अबारी हरिद्वार मा पोस्टेड छा अर अपणा बच्चों दगड़ा रौंदा छा। वो डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर SSA पौड़ीअर डायट चड़ीगांव मा प्रवक्ता पद परैं बि रैनि अर वां से पैलि विकासखंड कीर्तनगर का रा0 इ0 का0 न्यूली मा सहायक अध्यापक गणित का पद पर कार्यरत छा। 
     श्री चंदोला जी पुस्तकाें अर साहित्याै गहन अध्ययन कन्न वळा, एक शोधार्थी, शिक्षा का क्षेत्र मा नै - नै प्रयोग कन्न वळा, शिक्षक होणा दगड़ा एक बढ़िया 'लेखक ' अर एक उम्मदा कलाकार(पेंटिंग /स्कैच ) बि छायि। सन 2003 मा वूं कि " हारा हुआ राम " पुस्तक रूप मा प्रकाशित एक रोचक वैचारिक कथा अभिव्यक्ति छ, जै मा वूंन भगवान श्री राम का मिथक तैं एक नयो अर्थ देणै कोशिश करी।
      मि जब जूनियर हाईस्कूल मा शिक्षक छौ अर त वूं दगड़ा  भेंट पैलि बार 
ह्वे छै अर वूंन मि तैं प्रेरित करी छौ कि - "आप कुछ नया कीजिए और यदि कुछ लिखते हैं या कुछ नया करते हैं तो उसका प्रकाशन भी जरूरी है ।" श्री चंदोला जी कि बोलीं य बात मेरा दिमाग मा बैठी गे छै। मि तैं य बात बार -बार याद आंद ।
    
    श्री चंदोला जी कु निवास न्यू डांग मा छ। वू भौत ही कर्मठ, ईमानदार अर एक प्रखर वक्ता छा। सैद भगवानै यी इच्छा छै कि -एक विद्वान,क्रिएटिव, मिलनसार, सामाजिक,मजाकिया अर खुश मिजाज मनखी इथगा जल्दी हमारा बीच बटि चली जाला 🙏। काल का अगनै क्वी बि जीति नि सकदु यीं बात तैं अपणि पुस्तक "हारा हुआ राम " का माध्यम से समाज तैं सजग कन्न वळा श्री विश्वबंधु चंदोला जी  ये नश्वर संसार मा भौतिक रूप से हारि गैनि पर वू अपणि ईं कृति रचना का माध्यम से कालजयी बण्या राला। 
    भगवान वूं कि आत्मा तैं शान्ति दियां, अपणा ठाै मा जगा दियां अर वूं का परिवार तैं ये दुःख तैं सहन कन्नै सक्या दियां ।🙏🙏🙏 विनम्र श्रद्धांजलि 🙏🙏🙏
ॐ शांति.. शांति 🙏🙏🙏
                                       संदीप रावत
                             न्यू डांग, श्रीनगर गढ़वाल।

Tuesday, March 23, 2021

पौड़ी, दिनांक 23 मार्च 2021--''मण्डलीय कला एवं संगीत शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन ''


पौड़ी, दिनांक 23 मार्च 2021--
     ''मण्डलीय कला एवं संगीत शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन ''
(एक बेहतरीन कार्यक्रम एवं माध्यमिक शिक्षा के अपर निदेशक महोदय जी की एक सार्थक नई पहल )
       गढ़वाल मण्डल के अपर निदेशक (माध्यमिक शिक्षा ) महोदय श्रद्धेय श्री महावीर सिंह विष्ट जी द्वारा मण्डल मुख्यालय पौड़ी के प्रेक्षागृह (ऑडिटोरियम ) में एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह मे गढ़वाल मण्डल के शिक्षकों हेतु आयोजित की गई कला एवं संगीत की मंडल स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय, तृतीय आने वाले विजेताओं के साथ मण्डल स्तर के लिए चयनित सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
      SCERT द्वारा शिक्षकों के लिए लोक चित्र कला, चित्र संयोजन, पोस्टर चित्रांकन ( बालिका शिक्षा ) , शास्त्रीय संगीत -गायन , अर्ध शास्त्रीय संगीत - गायन, सुगम संगीत- गायन, लोक संगीत- गायन, शास्त्रीय संगीत वादन, सुगम संगीत वादन, लोक संगीत वादन, शास्त्रीय नृत्य, सेमी क्लासिकल नृत्य और लोकनृत्य की प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षकों ने प्रतिभाग किया गया था ।
      पौड़ी प्रेक्षागृह (ऑडिटोरियम ) में इस सम्मान समारोह से पूर्व शिक्षा संकुल में बनायी गयी सांस्कृतिक गैलरी का लोकार्पण गढ़ गौरव श्रद्धेय श्री नरेन्द्र सिंह नेगी जी द्वारा आज ही किया गया। 

      मुख्य अतिथि श्रद्धेय श्री नरेंद्र सिंह नेगी जी, विशिष्ट अथिति के रूप में उपस्थित लोक गायक आदरणीय श्री अनिल बिष्ट जी, गढ़वाली मासिक पत्रिका 'धाद ' के यशस्वी सम्पादक व प्रसिद्ध मंच संचालक आदरणीय श्री गणेश खुगशाल 'गणी ' जी के संबोधन लोक संस्कृति,लोक कला,लोक परम्परा एवं लोक सभ्यता को प्रोत्साहित और प्रभावित करने वाले थे। विशिष्ट अथिति के रूप में आदरणीय श्रीमती उषा नेगी जी की गरिमामयी उपस्थिति भी थी।
     अपर निदेशक (माध्यमिक शिक्षा ) महोदय श्रद्धेय श्री महावीर सिंह विष्ट जी ने इस अवसर पर कहा कि - "अपनी ओर से हमारा ये विचार व प्रयास था कि कला - संगीत के प्रतिभागियों का सम्मान गढ़ गौरव नेगी जी के हाथों से हो। "
श्रद्धेय श्री नरेन्द्र सिंह नेगी जी ने इस अवसर पर कहा कि - "विद्यालयों मे शास्त्रीय संगीत के साथ -साथ लोक गीत - संगीत की शिक्षा भी दी जानी आवश्यक है। इससे लोक की समझ भी बढ़ेगी और बच्चों को पढ़ाई के साथ -साथ अपने लोक की जानकारी भी प्राप्त होगी । साथ ही जो शिक्षक विद्यालयाे मे शिक्षण कार्य के साथ -साथ इस तरह के कार्य कर रहे हैं, उनके द्वारा बच्चों को भी सिखाया जाना एवं प्रोत्साहित करना आवश्यक है। "
      विशिष्ट अतिथि एवं संगीत के विभिन्न वाद्य यंत्राे को बजाने में पारंगत व अद्भुत कलावंत श्रद्धेय पंडित श्री मोहन सिंह रावत जी ने शास्त्रीय गायन -शास्त्रीय वादन सम्बन्धी प्रेरक एवं अद्भुत वक्तव्य दिया।
        विशिष्ट अथिति के रूप में उपस्थित लोक गायक, गढ़वाली फिल्म निर्देशक श्री अनिल बिष्ट जी ने कहा कि - "लोक नृत्य की प्रस्तुति के समय उचित कॉस्ट्यूम (पहनावा) का ध्यान रखना होगा। जिस स्थान के लोक नृत्य की प्रस्तुति दी जा रही है वहां का ही कॉस्ट्यूम होना चाहिए। "
      कार्यक्रम का बेहतरीन संचालन रचनात्मक यशस्वी शिक्षक साथी श्री वीरेंद्र खखरियाल जी ने किया। GGIC PAURI व BHAGATRAM MORDERN SCHOOL PAURI के बच्चों ने लोक गीतों पर बहुत सुन्दर नृत्य प्रस्तुत किया।
      समारोह मे उन शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने इस समरोह को आयोजित करने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस सम्मान समारोह में CEO बेसिक- माध्यमिक, राजकीय शिक्षक संघ के मण्डलीय अध्यक्ष श्री रवीन्द्र राणा जी, मण्डलीय महामंत्री डॉ.हेमंत पैन्यूली जी, पूर्व मण्डलीय महासचिव श्री शिव सिंह नेगी जी, शिक्षक संघ के अन्य पदाधिकारियों सहित बहुत बड़ी संख्या में शिक्षक -शिक्षिकाएं उपस्थित थीं। 

     वास्तव मे इस प्रतियोगिता से शिक्षक अत्यंत उत्साहित हैं। शिक्षकों का कहना है कि इस आयोजन इस प्रकार की प्रतियोगिता व आयोजन से उनमें एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है और अब दोगुने जोश से अपने- अपने कार्य कर सकेंगे। इस सम्मान से उनकी सामाजिक जिम्मेदारियां और भी बढ़ गई हैं।
      ज्ञातव्य है कि इस वर्ष SCERT (देहरादून ) के तत्वाधान मे ब्लॉक स्तर, जनपद स्तर, मण्डल स्तर और फिर राज्य स्तर पर इन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था और इन विभिन्न प्रतियोगिताओं में गढ़वाल मण्डल की कई शिक्षक - शिक्षिकाएं राज्य स्तर पर भी प्रथम स्थान पर रहे।
       अपर शिक्षा निदेशक महोदय माध्यमिक (गढ़वाल मण्डल ) श्री महावीर सिंह बिष्ट जी एवं का मण्डल स्तर पर की गई इस नई एवं बेहतरीन पहल हेतु हार्दिक धन्यवाद 🙏🙏साधुवाद। साथ ही उन सभी शिक्षक साथियों का भी आभार एवं धन्यवाद जिनकी इस कार्यक्रम के आयोजन मे महत्वपूर्ण भूमिका रही। 🙏🙏
                        रिपोर्ट --    संदीप रावत
                               प्रवक्ता (रसायन विज्ञान )
                      रा.इ.कॉ. धद्दी घंडियाल, बडियारगढ़
                                 (टिहरी गढ़वाल)

Thursday, February 25, 2021

** भारत सरकार के 'महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा )'में पौड़ी जनपद में 'लोकपाल ' पद पर प्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार, समालोचक, समाज वैज्ञानिक एवं 'आखर ' समिति के मार्गदर्शक डॉ.अरुण कुकसाल की नियुक्ति **

श्रीनगर गढ़वाल - 
           बहुत ही हर्ष का विषय है कि - प्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार, समालोचक, समाज वैज्ञानिक एवं  'आखर ' समिति  के मार्गदर्शक श्रद्धेय डॉ.अरुण कुकसाल जी को भारत सरकार  के प्रतिनिधि के रूप में ' महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ' से सम्बद्ध शिकायतों के निवारण एवं उनके अनुश्रवण के लिए चयन समिति की संस्तुति के आधार पर उत्तराखंड के जनपद पौड़ी (गढ़वाल) में 'लोकपाल ' के  महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है।
       सर्वविदित है कि समाज वैज्ञानिक, प्रशिक्षक, लेखक और घुमक्कड़ डाॅ. अरुण कुकसाल का पैतृक गांव 'चामी '( असवालस्यूं )  पौड़ी गढ़वाल में  है। वे अर्थशास्त्र विषय में पीएच.डी. हैं। हिमालयी समाज के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक मुद्दों पर पत्र - पत्रिकाओं तथा सोशियल मीडिया में नियमित लेखन करते हैं। डाॅ. कुकसाल की उद्यमिता विकास, यात्रा साहित्य तथा सांस्कृतिक विषयक 7 पुस्तकें प्रकाशित हैं। उद्यमिता शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए 'राष्ट्रीय उद्यमी उत्प्रेणा प्रशिक्षक सम्मान' प्राप्त है। 
      अनगिनत पुस्तकों का  गहन अध्ययन कर उनकी समलोचना करने वाले डॉ. अरुण कुकसाल जी     आकाशवाणी के नियमित वार्ताकार हैं। विद्यालयी शिक्षा, उत्तराखंड की पाठ्यचर्या में उद्यमिता विकास पाठ्यक्रम के समावेश में महत्वपूर्ण योगदान है।
 
       'गिरी विकास अध्ययन संस्थान 'उ.प्र., लखनऊ ( जीआईडीएस ),  उद्यमिता विकास संस्थान उ.प्र., लखनऊ ( आईईडीयूपी ), राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद्, उत्तराखंड ( एससीईआरटी ) तथा राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद्, उत्तराखंड ( यूकाॅस्ट ) में महत्वपूर्ण पदों पर प्रशंसनीय एवं महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

     वर्ष-2016 में स्वैच्छिक सेवा - निवृत्ति के बाद वर्तमान में आदरणीय डाॅ. अरुण कुकसाल जी  अपने पैतृक गांव ' चामी' में बच्चों, युवाओं और महिलाओं के लिए पुस्तकालय संचालन, कम्प्यूटर प्रशिक्षण तथा कैरियर मार्गदर्शन के कार्य में सक्रिय हैं। साथ ही बतौर समाज सेवी के रूप में  अभी तक 15 बार रक्तदान कर चुके हैं। डॉ. कुकसाल जी का  सानिध्य, मार्गदर्शन  एवं आशीर्वाद आखर ' समिति को सदैव  मिला है। 

         'लोकपाल' जैसे इस महत्वपूर्ण पद पर चयनित होने पर आदरणीय डॉ.अरुण कुकसाल जी को  मेरी एवं  'आखर ' परिवार  की ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ।
                                            संदीप रावत 
                                   अध्यक्ष - 'आखर 'समिति 
                                        श्रीनगर गढ़वाल।

Sunday, February 21, 2021

श्रीनगर गढ़वाल- 'आखर समिति ' ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (संदीप रावत )

"आखर समिति ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस "

श्रीनगर गढ़वाल - आखर समिति ने 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर शगुन वेडिंग प्वाइंट (यूनिटी स्क्वायरभवन) में कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने मातृभाषा के पक्ष में, गढ़वाली को बढ़ावा देने एवं इस भाषा के विकास हेतु अपनी-अपनी बात रखी और इस बात पर जोर दिया कि - "आम जन को अपनी मातृभाषा के विकास व संरक्षण हेतु आगे आना ही होगा एवं नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा से जोड़ने का संकल्प लेना ही होगा ,क्योंकि हमारी मातृभाषा हमारी पहचान है और यह हमारी अस्मितता से जुड़ी है। "
    आखर समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत अथितियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं नवोदित कवयित्री कंचन पंवार द्वारा गढ़वाली सरस्वती वंदना से हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद डॉ.विष्णुदत्त कुकरेती ने की। कार्यक्रम में प्रसिद्ध समाजसेवी व आन्दोलनकारी श्री अनिल स्वामी ,श्री डी. पी.खंडूड़ी ,डॉ0 अरुण कुकसाल, शिक्षक व रा. शि. संघ के पूर्व मण्डलीय महामंत्री श्री शिव सिंह नेगी विशिष्ट अथिति के रूप मे उपस्थित थे। श्रीमती आरती पुंडीर ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत किया।
    डॉ. अरुण कुकसाल ने कहा कि - "हमें मातृभाषा बचाने की पहल अपने घर से करनी होगी। साथ ही मातृभाषा के सम्बर्धन हेतु इस तरह के प्रयास बहुत आवश्यक हैं। "                कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.विष्णुदत्त कुकरेती  ने कहा कि - " अपनी मातृभाषा के संरक्षण एवं सम्बर्धन हेतु उसे अपने दैनिक जीवन में प्रयाेग करना होगा, सभी को इसे व्यवहार में लाना होगा । " श्री शिव सिंह नेगी ने कहा कि - "मातृभाषा के संरक्षण में संदीप रावत और आखर समिति के प्रयास व योगदान प्रेरणादायी हैं । गढ़वाली भाषा के संरक्षण एवं सम्बर्धन हेतु नई पीढ़ी को इससे जोड़ना होगा। "
     प्रसिद्ध समाजसेवी श्री अनिल स्वामी ने इस अवसर पर कहा कि - " इस तरह के कार्य समाज के लिए प्रेरणादायी हैं।गढ़वाली भाषा के संरक्षण हेतु 'आखर ' का यह प्रयास प्रेरक व सराहनीय है। "
      श्रीकृष्ण उनियाल, श्री विजय मेवाड़, शगुन रेस्टोरेंट के श्री प्रमोद उनियाल , श्री अरुणेश मैठाणी, श्री कमलेश बडोनी, डॉ.सुभाष पांडेय , श्री विभोर बहुगुणा,
श्रीमती आरती पुण्डीर ,श्रीमती बबीता थपलियाल मैठाणी, श्रीमती रेखा चमोली, , श्रीमती अंशी कमल, श्रीमती अनिता काला, श्रीमती राधा मैंदोली, श्रीमती सायिनी उनियाल, कंचन पंवार, श्वेता पंवार आदि गणमान्य लोग शामिल थे।
       इस अवसर पर कार्यक्रम में गढ़वाली कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। साथ ही उपस्थिति समस्त अन्य अतिथियों ने भी अपने -अपने विचार गढ़वाली में रखे।
गढ़वाली भाषा-साहित्य के लिए समर्पित 'आखर 'समिति के अध्यक्ष संदीप रावत ने कहा कि - "आखर समिति उत्तराखण्ड मातृभाषा अभियान ' द्वारा उत्तराखण्ड की मातृभाषाओं के पक्ष में लगभग पिछले एक महीने से अलग-अलग क्षेत्र एवं अलग- अलग पेशे से जुड़े व्यक्तियों के वीडियो के माध्यम से भी सोशल मीडिया पर इस अभियान को चला रही है। इस अभियान की संकल्पना एवं विचार गुजरात सूरत में रहने वाले 'आखर 'के सक्रिय एवं वैचारिक सदस्य गीतेश नेगी की है। इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद ये है कि - अपनी मातृभाषा के प्रति यहाँ का समाज जागरूक हो। "
     कार्यक्रम का संचालन आखर की सक्रिय सदस्य कवयित्री एवं मोटिवेशनल स्पीकर श्रीमती बविता थपलियाल ने किया। अंत मे 'आखर' के अध्यक्ष संदीप रावत ने उपस्थित सभी अथितियों का आभार व्यक्त किया।