मेरी प्रकाशित पुस्तकें :-


(1) एक लपाग ( गढ़वाली कविता-गीत संग्रह)- समय साक्ष्य, (2) गढ़वाळि भाषा अर साहित्य कि विकास जात्रा (गढ़वाली भाषा साहित्य का ऐतिहासिक क्रम )-संदर्भ एवं शोधपरक पुस्तक - विन्सर प्रकाशन, (3) लोक का बाना (गढ़वाली आलेख संग्रह )- समय साक्ष्य, (4) उदरोळ ( गढ़वाली कथा संग्रह )- उत्कर्ष प्रकाशन ,मेरठ


Saturday, September 10, 2022

श्रीनगर गढ़वाल में हुआ उनियाल कवयित्री बहनों( देवरानी, जेठानी) के 'आकाश पिता' एवं 'बीज का संचरण'  काव्य संग्रहों का  भव्य लोकार्पण - संदीप रावत

श्रीनगर गढ़वाल -   
     9 सितंबर 2022 को अदिति वेडिंग पॉइंट में  दो उनियाल  कवयित्री बहनों( देवरानी, जेठानी) के 'आकाश पिता' एवं 'बीज का संचरण'  काव्य संग्रहों का  भव्य लोकार्पण कार्यक्रम श्रीनगर के गणमान्य व्यक्तियों एवं कला, संस्कृति व साहित्य से जुड़े लोगों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। यह भव्य कार्यक्रम हिंदी साहित्य भारती उत्तराखंड एवं बिगुल संस्था के संयुक्त तत्वाधान में हुआ। 
    
     'आकाश पिता' काव्य संग्रह श्रीनगर गढ़वाल के हिंदुस्तान दैनिक के चीफ ब्यूरो डॉ. श्रीकृष्ण उनियाल जी की धर्म पत्नी श्रीमती साईनीकृष्ण उनियाल जी द्वारा रचित व अपने पिताजी को समर्पित है एवं  उनकी जेठानी श्रीमती कमला उनियाल जी द्वारा   'बीज का संचरण'  काव्य संग्रह 'रचित है। इन दोनों काव्य संग्रहों में विविध विषयों पर कलम चलाई गई है। इस भव्य कार्यक्रम में श्रीमती साईनीकृष्ण उनियाल की हिमालय दिवस पर देश के प्रहरी गिरिराज हिमालय को समर्पित विडियो गीत 'सीमा पर है खड़ा हिमालय 'का विमोचन भी किया गया जिसको कि बहुत पसंद किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती वंदना एवं मांगल गीत से हुआ।
     श्रीमती साईनीकृष्ण उनियाल जी द्वारा रचित काव्य संग्रह 'आकाश पिता ' पर सुप्रसिद्ध कवयित्री एवं लेखिका डॉ. कविता भट्ट शैलपुत्री जी ने  समीक्षात्मक  टिप्पणी की एवं श्रीमती कमला उनियाल  जी के 'बीज का संचरण'  काव्य संग्रह पर स्वनाम धन्य सुप्रसिद्ध कवि श्री नीरज नैथानी जी ने भी समीक्षात्मक  रूप में विचार रखे ।
      कार्यक्रम में अध्यक्ष प्रो. उमा मैठानी जी, मुख्य अतिथि वैश्वविक हिंदी शोध संस्थान के महानिदेशक डॉ. जयंती प्रसाद नौटियाल जी, विशिष्ट अथिति  देवप्रयाग विधान सभा के माननीय विधायक श्री विनोद कंडारी जी,डॉ. कविता भट्ट शैलपुत्री जी,श्री नीरज नैथानी जी एवं श्रीमती गंगा असनोड़ा थपलियाल जी उपस्थित थे।कार्यक्रम का  कुशल संचालन शिक्षक श्री महेंद्र बंगवाल जी ने किया।
         कार्यक्रम में व्यापार संघ के अध्यक्ष श्री दिनेश असवाल, प्रो. मोहन पंवार, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्री कृष्णानन्द मैथाणी,श्री संजय पांडेय, संदीप रावत, श्री जीतेन्द्र धिरवान, श्री विमल बहुगुणा,श्री सत्यजीत खंडूड़ी,श्री जयकृष्ण पैन्यूली, श्री कमलेश जोशी, श्रीमती राधा मैंदोली, श्रीमती संगीता फरासी, श्रीमती अंशी कमल जी आदि के साथ श्रीनगर गढ़वाल के कई गणमान्य व्यक्तियों के साथ प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की  गरिमामयी उपस्थिति थी।
                                   संदीप रावत
                         आखर चैरिटेबल ट्रस्ट
                              श्रीनगर गढ़वाल 
                            

Thursday, September 1, 2022

नगर निगम कार्यालय   परिसर स्थित पुस्तकालय का नाम 'डॉ0 गोविन्द चातक जी ' के नाम पर हो : आखर चैरिटेबल ट्रस्ट (अध्यक्ष -संदीप रावत,न्यू डांग ऐठाणा श्रीनगर गढ़वाल )

श्रीनगर गढ़वाल-
  
"नगर निगम कार्यालय   परिसर स्थित पुस्तकालय का नाम 'डॉ0 गोविन्द चातक जी ' के नाम पर हो  "
     श्रीनगर गढ़वाल में   आखर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा माननीय उप जिलाधिकारी एवं नगर निगम श्रीनगर गढ़वाल के माननीय प्रशासक श्री अजयवीर सिंह जी को नगर निगम कार्यालय   परिसर स्थित पुस्तकालय का नाम उत्तराखण्ड की दिवंगत विभूति,  गढ़वाली लोक साहित्य  को पहली बार संकलित एवं प्रकाशित  करने वाले श्रीनगर क्षेत्र के मूर्धन्य लोक साहित्यकार  'डॉ0 गोविन्द चातक जी ' के नाम पर रखने सम्बंधी ज्ञापन दिया गया । आखर ट्रस्ट द्वारा ज्ञापन के साथ इस  सम्बंधित पहले के प्रयासों के कागज -पत्र यानि प्रमाण भी दिये गए।
   
       नगर निगम भवन में मौजूद  पुस्तकालय का नाम डॉ. गोविन्द चातक जी के  नाम पर रखने की बात बात  'आखर' लगभग पिछले पांच साल से कर रहा h
है। नगर निगम प्रशासक एवं माननीय उप जिलाधिकारी   जी ने कहा कि - 'इस दिशा में वह अपनी ओर से  सकारात्मक   प्रयास करेंगे ।'
       पहले भी   नगर पालिका परिषद बोर्ड ,श्रीनगर गढ़वाल की 27 दिसम्बर 2017 वाली बैठक में आखर के प्रयासों से यह  प्रस्ताव पारित हुआ था कि - नगर पालिका परिषद कार्यालय स्थित पुस्तकालय का नाम श्रीक्षेत्र के डॉ0 गोविन्द चातक जी के नाम पर होगा एवं इसे  भव्य रूप दिया जाएगा । ' परन्तु बोर्ड का यह  प्रस्ताव मूर्त रूप नहीं ले पाया ।आखर 'इस दिशा में बहुत पहले से सतत  प्रयासरत है । नगर पालिका परिषद (श्रीनगर )कि  वर्तमान माननीय अध्यक्षा जी  को भी इस सम्बंधित ज्ञापन 'आखर '  की ओर से दिया गया था।
         नगर प्रशासक एवं उपजिलाधिकारी महोदय जी को ज्ञापन देने वालों में  आखर चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक संदीप रावत,ट्रस्टी  राहुल बिष्ट एवं दीवान सिंह मेवाड़, मुख्य ट्रस्टी लक्ष्मी रावत,ट्रस्ट की कोषाध्यक्ष रेखा चमोली शामिल थे ।
                                              संदीप रावत 
                           संस्थापक /अध्यक्ष-आखर ट्रस्ट 
                                           श्रीनगर गढ़वाल।

Tuesday, July 26, 2022

गढ़वाली रचना -सीख ©संदीप रावत, न्यू डांग-ऐठाणा,श्रीनगर गढ़वाल

    ' सीख '
भलि छ तुमारि
य भारि जीत,
पण! मि खुणि छ
य प्यारि सीख।
गद्यरा रुसायां छन त
क्वी बात नि,
एक पंद्यारु भौत छ
बुझौणा खुणि मेरि तीस।
            ©संदीप रावत, न्यू डांग-ऐठाणा
                 श्रीनगर गढ़वाल।


Sunday, March 13, 2022

न्यू डांग श्रीनगर गढ़वाल मा पैलि बार ह्वे 'होली मिलन समारोह 'कु आयोजन -------संदीप रावत, न्यू डांग श्रीनगर गढ़वाल।

 न्यू डांग, श्रीनगर गढ़वाल - 'डांग मा ऐंसु साल बटि एक नयि शुरुवात '



      ब्याळि ब्यखुनि दां 13 मार्च 2022 खुणि 'व्यापार सभाडांग -ऐंठाणा ' का तत्वाधान मा न्यू डांग मा पैलि बार 'होली मिलन समारोह 'कु आयोजन कर्ये गे।
         यो कार्यक्रम न्यू डांग, नियर -सौरभ मेडिकॉस
का सामणि ह्वे। कार्यक्रमौ संचालन आखर ट्रस्ट का उपाध्यक्ष डॉ.नागेंद्र रावत जीन करि। व्यापार सभा, डांग -ऐंठाणा 'का श्री सौरभ पाण्डेय जीन सब्बि अथितियों कु स्वागत करि। कार्यक्रमै शुरुवात दीप प्रज्वलन अर डांग का 'समर्थ सहायता महिला समूह' द्वारा सुन्दर मांगळ गायन से ह्वे। फिर न्यूत्यां कवि -डॉ. प्रकाश चमोली अर संदीप रावत कवयित्री - श्रीमती रेखा चमोली, श्रीमती अंशी कमल, श्रीमती अनीता काला जीन होळी, बसन्त अर प्रेम परैं केंद्रित रचना बांचिन । यां का बाद परम्परागत होळी गीतों गायन डॉ. प्रकाश चमोली अर संदीप रावत का दगड़ा पंडाल मा उपस्थित सब्बि लोगुन करि। होळी गीतों मा - खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर,फूलों से मथुरा छाई रही, मोरे पिया होली को खिलैया गीतों आनंद दर्शकोंन ले। कार्यक्रम मा उपस्थित डांग का सब्बि दर्शकों मा आज खूब उल्लास दिख्ये।
       कार्यक्रम मा मेडिकल कॉलेज (श्रीकोट )का माननीय प्राचार्य डॉ. रावत जी, श्री प्रदीप बिष्ट जी (अधिशासी अभियंता, पौड़ी नगर पालिका परिषद ),श्रीनगर का व्यापार संघ अध्यक्ष श्री दिनेश असवाल जी, पूर्व अध्यक्ष श्री वासुदेव कंडारी जी, मास्टर माइंड पब्लिक स्कूल का प्रबंधक श्री अर्जुन सिंह गुसाईं जी, श्री सतीश काला जी, नगर पालिका परिषद का डांग का सभासद श्री हरीश मियां जी , ये कार्यक्रम का संरक्षक श्री रणजीत सिंह धनाई जी, श्री पंकज सती जी, श्री सिद्धार्थ मियां, श्री लक्ष्मण सिंह,डांग क्षेत्र कि तमाम मातृशक्ति दगड़ा कतगै गणमान्य लोग उपस्थित छा।
भौत -भौत आभार अर धन्यवाद' व्यापार सभा, डांग -ऐंठाणा' का अध्यक्ष श्री सौरभ पाण्डेय जी अर वूंकी सैर्या टीम कु जौंन ये आयोजन तैं सुफल बणौण मा क्वी बि कोर -कसर नि छोड़ी अर डांग मा पैलि बार वृहद रूप मा होली मिलन समारोह कु आयोजन करि।

' फुल संग्राद अर होळि कि हार्दिक शुभकामना।'
संदीप रावत
अध्यक्ष :आखर चैरिटेबल ट्रस्ट
श्रीनगर गढ़वाल।

Monday, February 21, 2022

'आखर चैरिटेबल ट्रस्ट ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस ' ©संदीप रावत, न्यू डांग, श्रीनगर गढ़वाल।

'आखर चैरिटेबल ट्रस्ट ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस '
              
श्रीनगर गढ़वाल (21 फरवरी 2022)- गढ़वाली भाषा -साहित्य के संरक्षण एवं सम्बर्धन हेतु प्रयासरत 'आखर चैरिटेबल ट्रस्ट' ने 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर ट्रस्ट के कार्यालय रावत, न्यू  डांग में कार्यक्रम आयोजित किया । इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि -हमारी मातृभाषा ही हमारी पहचान है । मातृभाषा के पक्ष में विचार रखते हुए रचनाकारों /वक़्ताओं ने गढ़वाली भाषा को बढ़ावा देने, नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा से जोड़ने एवं इस भाषा के संरक्षण पर जोर दिया।
      आखर ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं कवयित्री अंशी कमल द्वारा गढ़वाली सरस्वती वंदना से हुई। कार्यक्रम में साहित्यकार एवं शिक्षाविद डॉ.अशोक बडोनी कहा कि - गढ़वाली भाषा के जो शब्द प्रचलन से बाहर हो रहे हैं उनको संरक्षित करने की आवश्यकता है।प्रत्येक को अपनी मातृभाषा के विकास व संरक्षण हेतु आगे आना ही होगा।'
      ट्रस्ट के उपाध्यक्ष एवं हे. न. ब. ग. विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रो. नागेंद्र रावत ने कहा कि -'अपनी मातृभाषा के प्रति हमें अपने दायित्वों को समझना होगा।एकल परिवार होने के कारण, दादा -दादी, नाना -नानी आदि के साथ नई पीढ़ी के न रह पाने के कारण भी आज अपनी मातृभाषा के प्रति हम सभी के दायित्व और भी बढ़ गए हैं । इस दिवस को मनाने का कारण यह है कि -कहीं ना कहीं आमजन अपनी दुधबोली से दूर हो रहा है।
       ट्रस्ट की कोषाध्यक्ष एवं कवयित्री रेखा चमोली ने कहा कि - " हमें मातृभाषा बचाने की पहल अपने घर से करनी होगी।हमारी मातृभाषा ही हमारी असली पहचान है । " योगा तृतीय सेमिस्टर की छात्रा श्वेता पंवार ने कहा कि - " हमें अपनी मातृभाषा में बात करते हुए शर्म महसूस नहीं होनी चाहिए एवं स्वयं ही बेझिझक होकर अपने से इसकी शुरुआत करनी चाहिए।अपनी मातृभाषा के संरक्षण एवं सम्बर्धन हेतु । "
      कार्यक्रम का संचालन करते हुए ट्रस्ट के अध्यक्ष संदीप रावत ने गढ़वाली भाषा की शब्द सामर्थ्य पर विचार रखे एवं कहा कि - अभिव्यक्ति की एक सशक्त माध्यम गढ़वाली भाषा के संरक्षण एवं सम्बर्धन की जिम्मेदारी हम सभी की बनती है। साथ ही संदीप रावत ने कहा कि - भाषाओं एवं बोलियों पर वैश्विक संकट को देखते हुए यूनेस्को ने वर्ष 2000 से प्रत्येक वर्ष 21फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने का निर्णय लिया था। मूल रूप में यह दिवस सारे विश्व में भाषा के पहले आंदोलन जो कि ढाका में बांग्ला भाषा के लिए हुआ था उसमें कई लोग शहीद हुए थे, तो उनकी याद में भी तब से यह दिवस मनाया जा रहा है। हम सभी को अपने दैनिक जीवन में इसे व्यवहार में लाना होगा।'
      इस अवसर पर कु.कंचन पंवार,अंशी कमल, रेखा चमोली आदि ने अपनी गढ़वाली रचनाएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम में संजय रावत,मयंक पंवार, संगीता पंवार आदि भी उपस्थित थे। अंत में ट्रस्ट की मुख्य ट्रस्टी श्रीमती लक्ष्मी रावत ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।



Thursday, February 10, 2022

' उत्तराखंड में चुनाव में यहाँ की भाषाएं कभी कोई मुद्दा नहीं होतीं।' ------संदीप रावत (गढ़वाली भाषा -साहित्य सेवी )


' चुनाव में यहाँ की भाषाएं कभी कोई मुद्दा नहीं होतीं।'
          ©संदीप रावत (गढ़वाली भाषा -साहित्य सेवी ),
          अध्यक्ष -आखर चैरिटेबल ट्रस्ट।

    हम सभी को अपना मतदान अवश्य करना चाहिए एवं सही व ईमानदार प्रत्याशी को अपना मत देना चाहिए जो विकास की बात करे,साथ ही यहाँ की लोकसंस्कृति एवं यहाँ की बोली -भाषाओं के सम्बन्ध में भी बात करे । परन्तु ये बड़ा सोचनीय विषय है कि किसी भी राजनीतिक दल के घोषणा पत्र में गढ़वाली, कुमाऊँनी भाषाएं और लोक संस्कृति कभी भी मुद्दा होतीं ही नहीं । गढ़वाली भाषा एवं कुमाऊँनी भाषा में निरंतर साहित्य रचा जा रहा है। साहित्य अकादमी, नई दिल्ली ने इन भी इन भाषाओं को मान्यता दे रखी है और मानती है कि ये भाषाएं भाषा के मानचित्र या खाके पर फिट बैठती हैं। परन्तु उत्तराखंड राज्य में इन भाषाओं को द्वितीय राज भाषा का दर्जा भी नहीं मिला जबकि ये भाषाएं आठवीं अनुसूची में शामिल होने का हक़ रखती हैं।
        इन भाषाओं को मान्यता दिलवाने की बात कोई भी दल या नेता कभी नहीं करता।केवल वोटरों को रिझाने के लिए चुनाव के समय वोट के लिए कुछ नेता गढ़वाली या कुमाउंनी में जरूर भाषण देते हैं या यहाँ की मातृभाषाओं में लोगों से बात करते हैं। गढ़वाली गीतों या कुमाऊँनी के माध्यम से भी प्रत्याशियों का खूब प्रचार हो रहा है,पर न जाने क्यों भाषा का मुद्दा हर चुनाव में गायब रहता है।

कुछ पंक्तियां चुनाव पर --
       'चुनौ'
'कैकि होंदि जीत
अर कैकि होंदि हार,
जनता उनि पित्येंद -पिसेंद
सैंदी महंगै मार।
जितणौ बाद सब्यूंन सदानि
अपणि मनै कार,
तौंकि मवासि उब्बों उठदि
अर,जनता परैं भगार।'(वर्ष 2013
में प्रकाशित पुस्तक 'एक लपाग'से ©संदीप रावत, श्रीनगर )


Monday, January 24, 2022

रचना -' ऐगेनि नेता '©संदीप रावत, श्रीनगर गढ़वाल। वर्ष -2013 मा प्रकाशित पुस्तक 'एक लपाग 'बटि..

 ' ऐगेनि नेता ' ©संदीप रावत, श्रीनगर गढ़वाल।
     य रचना वर्ष -2013 मा प्रकाशित पुस्तक 'एक लपाग' बटि च।
(नोट - भारै! य बि सै बात च कि सब्या नेता इन नि होंदा।)