मेरी प्रकाशित पुस्तकें :-


(1) एक लपाग ( गढ़वाली कविता-गीत संग्रह)- समय साक्ष्य, (2) गढ़वाळि भाषा अर साहित्य कि विकास जात्रा (गढ़वाली भाषा साहित्य का ऐतिहासिक क्रम )-संदर्भ एवं शोधपरक पुस्तक - विन्सर प्रकाशन, (3) लोक का बाना (गढ़वाली आलेख संग्रह )- समय साक्ष्य, (4) उदरोळ ( गढ़वाली कथा संग्रह )- उत्कर्ष प्रकाशन ,मेरठ


Monday, November 7, 2022

आखर ट्रस्ट के तत्वाधान में आधुनिक भाषा विभाग के प्रो. सुरेश ममगाईं जी द्वारा लिखित पुस्तक     (गढ़वाल:इतिहास, संस्कृति, भाषा एवं साहित्य ) लोकार्पित -संदीप रावत, श्रीनगर गढ़वाल।

श्रीनगर गढ़वाल -

       "आखर चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वाधान में सम्पन्न हुआ  प्रो. सुरेश ममगाईं जी द्वारा लिखित पुस्तक     (गढ़वाल:इतिहास, संस्कृति, भाषा एवं साहित्य )का लोकार्पण "
         06 नवम्बर 2022 को राजकीय स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय उत्तरकाशी के आधुनिक भाषा विभाग के प्रो. सुरेश ममगाईं जी की महत्वपूर्ण पुस्तक 'गढ़वाल-इतिहास, संस्कृति, भाषा एवं साहित्य ' का लोकार्पण स्क्वायर यूनिटी भवन (अंजलि मेडिकल स्टोर भवन )में स्थित 'शगुन रेस्टोरेंट 'में  मंचासीन मुख्य अतिथि हे.न. ब. गढ़वाल विश्वविद्यालय की हिंदी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष  प्रो. उमा मैठाणी (अवकाश प्राप्त)जी , कार्यक्रम अध्यक्ष हे.न. ब. गढ़वाल केंद्रीय विश्व विद्यालय श्रीनगर गढ़वाल के राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एम. एम. सेमवाल जी , विशिष्ट अतिथि सुप्रसिद्ध लेखिका एवं कवयित्री डॉ.कविता भट्ट 'शैलपुत्री ' जी,राजकीय महाविद्यालय जयहरीखाल से आए अतिथि वक़्ता डॉ. उमेश ध्यानी जी की  गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।यह लोकार्पण कार्यक्रम 'आखर ट्रस्ट 'के तत्वाधान में सम्पन्न हुआ।
         अथितियों के स्वागत एवं दीप प्रज्वलन  के पश्चात कवयित्री श्रीमती राधा मैंदोली द्वारा सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की गई। ट्रस्ट के सदस्य राकेश जिर्वाण 'हंस' द्वारा लोकर्पित पुस्तक के लेखक  प्रो. सुरेश ममगाईं जी का जीवन परिचय,शोध कार्य और रचनाकर्म सभी के सम्मुख रखा।कार्यक्रम का संचालन ट्रस्ट के उपाध्यक्ष एवं गढ़वाल  केंद्रीय विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग के डॉ. नागेंद्र रावत ने किया।  मुख्य अतिथि प्रो. उमा मैठाणी ने इस पुस्तक को बहुत महत्वपूर्ण बताया और साथ ही कहा कि-' यह एक महत्वपूर्ण शोध कार्य है और गढ़वाल के इतिहास एवं संस्कृति को साथ लेकर गढ़वाली भाषा -साहित्य की पूर्ण विवेचना पुस्तक में की गई है।'
    कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. एम. एम. सेमवाल ने इस अवसर पर कहा कि - 'गढ़वाल की संस्कृति, इतिहास, गढ़वाली भाषा के इतिहास एवं साहित्य को एक ही पुस्तक में समवेत स्थान देना एक महत्वपूर्ण कार्य है।साथ ही कहा कि - प्रो. सुरेश ममगाईं अभी भी  महत्वपूर्ण शोध कार्यों पर लगे हुए हैं। लेखक ने इस पुस्तक में गढ़वाल और उसके सीमावर्ती क्षेत्रों की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक इतिहास की सप्रामाणिक विवेचना की है।'
     इस पुस्तक की  विवेचना करते हुए ट्रस्ट के  अध्यक्ष संदीप रावत ने कहा कि -'इस पुस्तक के अध्ययन के पश्चात गढ़वाल एवं गढ़वाली भाषा -साहित्य के विविध महत्वपूर्ण पक्ष उभरकर सामने आते हैं।गढ़वाली भाषा -साहित्य के प्रमुख मील स्तम्भों की जानकारी इस पुस्तक में मिलती है। यह पुस्तक गढ़वाली भाषा -साहित्य का साहित्येतिहास भी है। समीक्ष्य पुस्तक में गढ़वाल के संक्षिप्त इतिहास, संस्कृति एवं गढ़वाली भाषा के उपलब्ध साहित्य को जिस प्रकार से नियोजित किया गया है निश्चित रूप से प्रसंसनीय है। प्रो. सुरेश ममगाईं के अथक प्रयासों के फलस्वरुप उनके इस प्रकार के शोध ग्रन्थ समाज में आ रहे हैं।'
    विशिष्ट अतिथि लेखिका एवं मुख्य न्यासी 'शैलपुत्री फाउंडेशन' की डॉ. कविता भट्ट 'शैलपुत्री 'ने इस अवसर पर कहा कि - 'आखर ट्रस्ट द्वारा गढ़वाली भाषा -साहित्य के सम्बर्धन हेतु किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। प्रो.सुरेश ममगाईं जी की यह पुस्तक शोधार्थियों हेतु अवश्य उपयोगी साबित होगी।'
       रा. महाविद्यालय जयहरीखाल से आए अतिथि वक़्ता डॉ. उमेश ध्यानी ने इस पुस्तक को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि -' प्रो.सुरेश ममगाईं ने इस पुस्तक पर लगभग विगत 6 वर्षों  से कड़ी मेहनत की है। इतिहास एवं साहित्येतिहास लेखन एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। इतिहासकार वह लिखता है जो उसने पढ़ा और जो प्रमाण उसकी नजरों के सामने आते हैं।'
    लोकर्पित पुस्तक के लेखक प्रो. सुरेश ममगाईं ने इस अवसर पर कहा कि ' इस पुस्तक को लिखने का मुख्य  उद्देश्य यह है कि - 'गढ़वाल के संक्षिप्त इतिहास, संस्कृति एवं गढ़वाली भाषा एवं गढ़वाली साहित्य की जानकारी एक ही पुस्तक में हो एवं शोधार्थी इससे लाभान्वित हो सकें। यह पुस्तक समाज विज्ञान के शोधर्थियों हेतु भी उपयोगी साबित होगी।'
       ट्रस्ट के  सम्मानित ट्रस्टी,कई शिक्षक -शिक्षिकाओं, सामाजिक सरोकारों  एवं मीडिया  से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में यह कार्यक्रम  हुआ। 
     कार्यक्रम एवं सम्मान समरोह में ट्रस्टी रेखा चमोली (कोषाध्यक्ष ) , ट्रस्टी श्री दीवान सिंह मेवाड़ , ट्रस्टी श्रीमती अंजना घिल्डियाल ,ट्रस्टी श्री सौरभ बिष्ट,सदस्य राकेश जिरवान,कु. श्वेता एवं कु. वंदना नेगी ,जन सरोकारों से जुड़े श्री अनिल स्वामी , डॉ. अशोक बडोनी, डॉ. हर्षमणि पाण्डेय,श्री डी. पी. खंडूड़ी,  रा. माध्यमिक शिक्षक संघ टिहरी के जिलाध्यक्ष श्री दिलवर रावत, शगुन रेस्टोरेंट एवं वेडिंग पॉइंट के श्री प्रमोद उनियाल,रीजनल रिपोर्टर की श्रीमती गंगा असनोड़ा , श्रीमती उपासना भट्ट,श्रीमती मीना डोभाल , कवयित्री श्रीमती सायिनी उनियाल , श्रीमती अनीता काला, श्री प्रभाकर बाबुलकर,श्री नंदकिशोर नैथानी, श्री राजेश बडोनी,श्री कुलदेव रावत सहित कई अन्य शिक्षक एवं  मीडिया जगत से डॉ. श्रीकृष्ण उनियाल, श्री गोपी मैठाणी, श्री धनवीर बिष्ट, श्री तेजपाल चौहान,पौड़ी से डॉ. कमलेश मिश्रा एवं प्रसिद्ध दिवंगत कालजयी चित्रकार बी. मोहन जी के सुपुत्र श्री आशीष मोहन नेगी जी,उत्तरकाशी से श्री दीपेंद्र सिंह, SRT टिहरी से श्री शुभम कंडारी एवं श्री सोबत सिंह, गोपेश्वर से डॉ. मोनिश कुमार आदि की गरिमामयी उपस्थिति थी।
       

कार्यक्रम के अंत में आखर ट्रस्ट के संस्थापक एवं अध्यक्ष संदीप रावत द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित सभी विद्वतजनों का आभार व्यक्त किया।
                                        संदीप रावत
                                     अध्यक्ष/संस्थापक 
                                     आखर चैरिटेबल ट्रस्ट
                                        श्रीनगर गढ़वाल।

Tuesday, October 11, 2022

''मेरा जीवन से जुड्यां कुछ किस्सा, मेरा जीवन का हिस्सा " -संदीप रावत ,न्यू डांग , श्रीनगर गढ़वाल ।

''मेरा जीवन से जुड्यां कुछ किस्सा, मेरा जीवन का हिस्सा "
        -संदीप रावत ,न्यू डांग , श्रीनगर गढ़वाल ।
      पौड़ी जिला का इंटर कॉलेज वेदीखाल (वीरोंखाल ब्लॉक )मा मेरा पिताजी श्री महावीर सिंह रावत एक शिक्षक छायि अर मेरी दर्जा एक बटि हाई स्कूल तकै पढ़ै वखि ह्वे छै। हम हफ्ता - द्वी हफ्ता मा अपणा गौं अलखेतू- कसाणी (पोखड़ा ब्लॉक )आणा -जाणा रौंदा छायि किलैकि माँजि पैलि वखि रौंदि छै। हमारा चौका तिरवाल दळम्या डाळाे छौ। ब्वेन बतै छौ कि वा डाळी मेरा दादा जीन लगै छै। मेरा अपणा दादा जी नि देख्यां छा, पण वे दळम्या डाळा का रूप मा मि वूं तैं देख्यदु छौ।। जब बि मि छ्वटु छौ अर घार जांदु छौ त वे डाळा नीस बैठी पढ़दु बि छौ अर गीत बि लगांदु अर मिसांदु छौ। मेरु जलम अपणा ही गौं मा ह्वे छौ त मि तैं याद छ कि - वे दळम्या डाळा नीस ब्वे बि बैठदि छै अर मि अपणी ब्वे कि खुचली मा बैठदु छौ, उंगदु छौ। वे ही डाळा सामणी मि कथगै बार गोली -गुच्छी खेल्दु छौ अर ब्याखुनि दां अपणा दगड़्याें दगड़ा गप्प -सप्प लगांदु छौ। वु दळम्या डाळाे बि एक तरों से मेरु दगड़्या छौ। वे दगड़ि कतगै बार मि यखुली मा बच्यांदु बि छौ।
मेरा पिताजी को ट्रांसफर देवप्रयाग ह्वे ग्ये त दर्जा दस कन्नौ बाद जब हम सब्या लोग बि र यानि देवप्रयाग ऐग्यो। जन कि यख होंद ही छ, चाहे मजबूरी मा ही होंद, पर - 'पोथीला बि फुर्र उड़ीनी अपणा घोलु छोड़िक ' अर फिर हम सब्या श्रीनगरा तरफां ऐ गयां। मतलब मेरी ब्वे बि हम दगड़ा ऐग्ये त वां का कुछ टैम बाद तक बि मैना - द्वी मैना अपणा गौं मा हमारि आणि - जाणी लगीं रै। पर, व्यस्तता अर दूर होणा वजौ से बाद मा आणि - जाणि जरा कम ह्वे गे छै । हर्बी -हर्बी कैरिक बगत बि सौंफळी मारी सटगणु रै। ब्वे -बुबा, बड़ों अर गुरुजनों आशीर्वाद से मि बि मास्टरी नौकरी परैं लगि गयूं अर ब्योबंद बि ह्वे गे।
अपणा गौं जाणे भारी रौंस लगीं रांदि छै त ब्याे का कुछ टैम बाद एक दिन मि रैट -पैट ह्वेकि अपणी ब्वारि दगड़ा अपणा गौं पौंछि गयूँ एक दिन। हौरि जगौं कि तरौं मेरा गौं मा बि अब भौं कुछ बदलि ग्ये छौ । मथी अपणि कुलदेवी (भगवती )दर्शन कन्ना बाद जब मि अपणा चौक मा पौंछयुं त क्या देख्दु कि - वु दळम्या डाळाे कट्ये गे छौ। जब मिन यो देखि त हकदक रै गयूं। सुन्नताळ ह्वे ग्ये मी कु तैं। मेरा दादाजी लगाईं वा डाळी यानि वा निशानी अब नि रै। मेरी आंख्यूं मा अंसधरि अर मेरा दिल परैं क्या बीती, मी जाणदु। अब क्या ब्वन? जौंन वे दलम्या डाळाे काटि छौ वू बि हमारा ही स्वारा-भारा छा अर वून बोलि कि - मजबूरी मा यो काम ह्वे। ज्यू त ब्वन्नू छौ कि अंगर्याळ बणी छिबटी जौं वूं पर, पर क्या कन्न। मि बि एक -द्वी दिन बाद अपणी घरवाळी दगड़ा श्रीनगर ऐ गयूँ। भौत दिन तक वो दळम्या डाळाे मेरी आंख्यूँ मा रिटणु रै।
हमारा जीवन मा इन घटना घटणी रौंदन जो कि बाद मा यि घटना किस्सा बणी जांदन अर किस्सा कथों रूप ले लिंदन। ठीक इन्नी यो किस्सा बि मेरा 'उदराेळ ' कथा संग्रै कि कथा ' दळम्या डाळाे ' रूप मा ये कथा संग्रै को एक हिस्सा बणी।
      इन्नी हौरि छ एक किस्सा मेरा छवट्टा -छौंद कु।गलतियों पर अपणा पिताजी घप्पक बि भौत खईं मेरी, जो कि मेरा वास्ता एक तरों से प्रसाद ही छौ। जब दर्जा सात मा छौ त एक बार मि दगड़यों दगड़ी वेदिखाल मा बस अड्डा से जरा दूर किसाणा गौं तरफां गयां छा अर वख एक पाणी हौज छै। जब हम वां का माथ अटगणा छायि त मि कलतम्म वीं हौज मा पड़ी गयूं । असंद क्या मोरण-बचण ह्वे ग्ये मी खुणी। मी दगड़ा छोरोंन तब हल्ला मचायि अर क्वी सयाणु आदिम उना बटि जाणा छायि त वूंन भैर निकाल मि तैं। वे दिन नै जिंदगी मिली छै मि तैं, किलैकि थोड़ा हौरी देर होंदी त ह्वे गे छै सांस बंद । सकस्याट ह्वे गे छौ बिजाम । य खबर मेरा घर मा माँ - पिताजि तक बि पौंछि गे छै। ब्वे त ब्वे ही होंद, र,वे -र,वेकि बुरा हाल छा ब्वे का। पिताजिन त भली कैरिक क्लास लियाली छै मेरी... कि किलै दनकणा छायि वख? अर फिर तब त दगड़ा मा सुटान बि। बाद मा फिर हम दगड़्या वीं तरफां जरूर जांदा छायि पर वीं हौज का धोरा नि जांदा छा।

         भौत सारा संस्मरण मेरी साहित्यिक जात्रा से जुड्यां छन। बाद मा 'गढ़वाळि भाषा अर साहित्य कि विकास जात्रा(चौदवीं शताब्दी बटि अबारि तक  गढ़वाळि भाषा -साहित्य को ऐतिहासिक विकास क्रम)' ज्वा सन् 2014 मा प्रकाशित ह्वे, ईं पुस्तक तैं लिखण से पैलि अर ईं पुस्तक का लिखणा दौरान वां से जुड़यां कतगै संस्मरण छन। पर, एक घटना कु जिक्र मि जरूर कन्न चांदु। सन 2012 मा देवप्रयाग मि गढ़वाळि भाषा सम्बन्धी ऐतिहासिक धरोहराें साक्ष्य (ताम्रपत्र, रजत पत्र, शिलालेख आदि )देखणा गयुं। जब ये दौरान मि 'खेत्रपाल मंदिर ' मा द्वार अभिलेख देखणु गयूं त, वख वे टैम पर कर्नाटकाै एक सनक्या पुजारी छौ। मिन द्वार अभिलेख त देखियाली छौ, पर तबार्यूं वु पुजारी ऐ गे अर वेन मि तैं डरैकि सड़क तक दौड़े दे। बाद मा मि तैं पता लगी कि वो पुजारी दिमाग से जरा हिल्यूं छाै ।
      इन्नी एक हौरि घटना छ। हमारि श्रीनगर गढ़वाळ का रामलीला मैदाना सामणी दुकान छ । मि बि पैलि अपणी दुकान मा बैठदु छौ। फरवरी सन 2011 मा एक दिन ब्याखुनि दां मि अर बड़ो भै संजय रावत दुकान बढ़ाैणा छा। मेरी वे बगत गिच्चा मा टाैफी रखीं छै। अचंणचक वा टाैफी मेरी गौळी मा अटकि गे त मेरी सांस बि अटकि गे । बस! वे बगत मोरणी - बचणी ह्वे गे छै मै कु तैं। मेरु बड़ो भै बि खाैळयूं रै गे अर फिर वेन मेरी पीठ अर धाैण परैं मारी त मेरी गौळी मा फसीं टाैफी भैर निकलि गे । ईं घटना तुरंत बाद ही ' एक लपाग ' कि य रचना - " भैर भितर आंदा-जांदा सांस च य जिंदगी " उपजि।
       इलैइ बोलदन कि - मनखी तैं जो कुछ बि मिल्द हैंका बटि मिल्द, अपणा समाज अर प्रकृति बटि मिल्द, अपणा अनुभवाें से मिल्द अर ये संग्सार मा मनखि अफुं दगड़ा कुछ बि लेकि नि आन्दु। इलैइ मिन बि जो बि पायि अर जो बि सीखि होर्यूं बटि पायि , ये समाज, प्रकृति अर अनुभवाें से पायि ।
                                         संदीप रावत 
                             न्यू डांग , श्रीनगर गढ़वाल 
                                 मो - 9411155059 
नोट - मेरा जीवन का यो कुछ किस्सा श्री गिरीश बडोनी जी अर श्री अनिल सिंह नेगी जी द्वारा सम्पादित, सन् 2021 मा प्रकाशित पुस्तक 'किसम -किसमा किसमा ' पुस्तक मा 'दळम्यो डाळाे ' नौ से प्रकाशित छन।





Saturday, September 10, 2022

श्रीनगर गढ़वाल में हुआ उनियाल कवयित्री बहनों( देवरानी, जेठानी) के 'आकाश पिता' एवं 'बीज का संचरण'  काव्य संग्रहों का  भव्य लोकार्पण - संदीप रावत

श्रीनगर गढ़वाल -   
     9 सितंबर 2022 को अदिति वेडिंग पॉइंट में  दो उनियाल  कवयित्री बहनों( देवरानी, जेठानी) के 'आकाश पिता' एवं 'बीज का संचरण'  काव्य संग्रहों का  भव्य लोकार्पण कार्यक्रम श्रीनगर के गणमान्य व्यक्तियों एवं कला, संस्कृति व साहित्य से जुड़े लोगों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। यह भव्य कार्यक्रम हिंदी साहित्य भारती उत्तराखंड एवं बिगुल संस्था के संयुक्त तत्वाधान में हुआ। 
    
     'आकाश पिता' काव्य संग्रह श्रीनगर गढ़वाल के हिंदुस्तान दैनिक के चीफ ब्यूरो डॉ. श्रीकृष्ण उनियाल जी की धर्म पत्नी श्रीमती साईनीकृष्ण उनियाल जी द्वारा रचित व अपने पिताजी को समर्पित है एवं  उनकी जेठानी श्रीमती कमला उनियाल जी द्वारा   'बीज का संचरण'  काव्य संग्रह 'रचित है। इन दोनों काव्य संग्रहों में विविध विषयों पर कलम चलाई गई है। इस भव्य कार्यक्रम में श्रीमती साईनीकृष्ण उनियाल की हिमालय दिवस पर देश के प्रहरी गिरिराज हिमालय को समर्पित विडियो गीत 'सीमा पर है खड़ा हिमालय 'का विमोचन भी किया गया जिसको कि बहुत पसंद किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती वंदना एवं मांगल गीत से हुआ।
     श्रीमती साईनीकृष्ण उनियाल जी द्वारा रचित काव्य संग्रह 'आकाश पिता ' पर सुप्रसिद्ध कवयित्री एवं लेखिका डॉ. कविता भट्ट शैलपुत्री जी ने  समीक्षात्मक  टिप्पणी की एवं श्रीमती कमला उनियाल  जी के 'बीज का संचरण'  काव्य संग्रह पर स्वनाम धन्य सुप्रसिद्ध कवि श्री नीरज नैथानी जी ने भी समीक्षात्मक  रूप में विचार रखे ।
      कार्यक्रम में अध्यक्ष प्रो. उमा मैठानी जी, मुख्य अतिथि वैश्वविक हिंदी शोध संस्थान के महानिदेशक डॉ. जयंती प्रसाद नौटियाल जी, विशिष्ट अथिति  देवप्रयाग विधान सभा के माननीय विधायक श्री विनोद कंडारी जी,डॉ. कविता भट्ट शैलपुत्री जी,श्री नीरज नैथानी जी एवं श्रीमती गंगा असनोड़ा थपलियाल जी उपस्थित थे।कार्यक्रम का  कुशल संचालन शिक्षक श्री महेंद्र बंगवाल जी ने किया।
         कार्यक्रम में व्यापार संघ के अध्यक्ष श्री दिनेश असवाल, प्रो. मोहन पंवार, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्री कृष्णानन्द मैथाणी,श्री संजय पांडेय, संदीप रावत, श्री जीतेन्द्र धिरवान, श्री विमल बहुगुणा,श्री सत्यजीत खंडूड़ी,श्री जयकृष्ण पैन्यूली, श्री कमलेश जोशी, श्रीमती राधा मैंदोली, श्रीमती संगीता फरासी, श्रीमती अंशी कमल जी आदि के साथ श्रीनगर गढ़वाल के कई गणमान्य व्यक्तियों के साथ प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की  गरिमामयी उपस्थिति थी।
                                   संदीप रावत
                         आखर चैरिटेबल ट्रस्ट
                              श्रीनगर गढ़वाल 
                            

Thursday, September 1, 2022

नगर निगम कार्यालय   परिसर स्थित पुस्तकालय का नाम 'डॉ0 गोविन्द चातक जी ' के नाम पर हो : आखर चैरिटेबल ट्रस्ट (अध्यक्ष -संदीप रावत,न्यू डांग ऐठाणा श्रीनगर गढ़वाल )

श्रीनगर गढ़वाल-
  
"नगर निगम कार्यालय   परिसर स्थित पुस्तकालय का नाम 'डॉ0 गोविन्द चातक जी ' के नाम पर हो  "
     श्रीनगर गढ़वाल में   आखर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा माननीय उप जिलाधिकारी एवं नगर निगम श्रीनगर गढ़वाल के माननीय प्रशासक श्री अजयवीर सिंह जी को नगर निगम कार्यालय   परिसर स्थित पुस्तकालय का नाम उत्तराखण्ड की दिवंगत विभूति,  गढ़वाली लोक साहित्य  को पहली बार संकलित एवं प्रकाशित  करने वाले श्रीनगर क्षेत्र के मूर्धन्य लोक साहित्यकार  'डॉ0 गोविन्द चातक जी ' के नाम पर रखने सम्बंधी ज्ञापन दिया गया । आखर ट्रस्ट द्वारा ज्ञापन के साथ इस  सम्बंधित पहले के प्रयासों के कागज -पत्र यानि प्रमाण भी दिये गए।
   
       नगर निगम भवन में मौजूद  पुस्तकालय का नाम डॉ. गोविन्द चातक जी के  नाम पर रखने की बात बात  'आखर' लगभग पिछले पांच साल से कर रहा h
है। नगर निगम प्रशासक एवं माननीय उप जिलाधिकारी   जी ने कहा कि - 'इस दिशा में वह अपनी ओर से  सकारात्मक   प्रयास करेंगे ।'
       पहले भी   नगर पालिका परिषद बोर्ड ,श्रीनगर गढ़वाल की 27 दिसम्बर 2017 वाली बैठक में आखर के प्रयासों से यह  प्रस्ताव पारित हुआ था कि - नगर पालिका परिषद कार्यालय स्थित पुस्तकालय का नाम श्रीक्षेत्र के डॉ0 गोविन्द चातक जी के नाम पर होगा एवं इसे  भव्य रूप दिया जाएगा । ' परन्तु बोर्ड का यह  प्रस्ताव मूर्त रूप नहीं ले पाया ।आखर 'इस दिशा में बहुत पहले से सतत  प्रयासरत है । नगर पालिका परिषद (श्रीनगर )कि  वर्तमान माननीय अध्यक्षा जी  को भी इस सम्बंधित ज्ञापन 'आखर '  की ओर से दिया गया था।
         नगर प्रशासक एवं उपजिलाधिकारी महोदय जी को ज्ञापन देने वालों में  आखर चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक संदीप रावत,ट्रस्टी  राहुल बिष्ट एवं दीवान सिंह मेवाड़, मुख्य ट्रस्टी लक्ष्मी रावत,ट्रस्ट की कोषाध्यक्ष रेखा चमोली शामिल थे ।
                                              संदीप रावत 
                           संस्थापक /अध्यक्ष-आखर ट्रस्ट 
                                           श्रीनगर गढ़वाल।

Tuesday, July 26, 2022

गढ़वाली रचना -सीख ©संदीप रावत, न्यू डांग-ऐठाणा,श्रीनगर गढ़वाल

    ' सीख '
भलि छ तुमारि
य भारि जीत,
पण! मि खुणि छ
य प्यारि सीख।
गद्यरा रुसायां छन त
क्वी बात नि,
एक पंद्यारु भौत छ
बुझौणा खुणि मेरि तीस।
            ©संदीप रावत, न्यू डांग-ऐठाणा
                 श्रीनगर गढ़वाल।


Sunday, March 13, 2022

न्यू डांग श्रीनगर गढ़वाल मा पैलि बार ह्वे 'होली मिलन समारोह 'कु आयोजन -------संदीप रावत, न्यू डांग श्रीनगर गढ़वाल।

 न्यू डांग, श्रीनगर गढ़वाल - 'डांग मा ऐंसु साल बटि एक नयि शुरुवात '



      ब्याळि ब्यखुनि दां 13 मार्च 2022 खुणि 'व्यापार सभाडांग -ऐंठाणा ' का तत्वाधान मा न्यू डांग मा पैलि बार 'होली मिलन समारोह 'कु आयोजन कर्ये गे।
         यो कार्यक्रम न्यू डांग, नियर -सौरभ मेडिकॉस
का सामणि ह्वे। कार्यक्रमौ संचालन आखर ट्रस्ट का उपाध्यक्ष डॉ.नागेंद्र रावत जीन करि। व्यापार सभा, डांग -ऐंठाणा 'का श्री सौरभ पाण्डेय जीन सब्बि अथितियों कु स्वागत करि। कार्यक्रमै शुरुवात दीप प्रज्वलन अर डांग का 'समर्थ सहायता महिला समूह' द्वारा सुन्दर मांगळ गायन से ह्वे। फिर न्यूत्यां कवि -डॉ. प्रकाश चमोली अर संदीप रावत कवयित्री - श्रीमती रेखा चमोली, श्रीमती अंशी कमल, श्रीमती अनीता काला जीन होळी, बसन्त अर प्रेम परैं केंद्रित रचना बांचिन । यां का बाद परम्परागत होळी गीतों गायन डॉ. प्रकाश चमोली अर संदीप रावत का दगड़ा पंडाल मा उपस्थित सब्बि लोगुन करि। होळी गीतों मा - खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर,फूलों से मथुरा छाई रही, मोरे पिया होली को खिलैया गीतों आनंद दर्शकोंन ले। कार्यक्रम मा उपस्थित डांग का सब्बि दर्शकों मा आज खूब उल्लास दिख्ये।
       कार्यक्रम मा मेडिकल कॉलेज (श्रीकोट )का माननीय प्राचार्य डॉ. रावत जी, श्री प्रदीप बिष्ट जी (अधिशासी अभियंता, पौड़ी नगर पालिका परिषद ),श्रीनगर का व्यापार संघ अध्यक्ष श्री दिनेश असवाल जी, पूर्व अध्यक्ष श्री वासुदेव कंडारी जी, मास्टर माइंड पब्लिक स्कूल का प्रबंधक श्री अर्जुन सिंह गुसाईं जी, श्री सतीश काला जी, नगर पालिका परिषद का डांग का सभासद श्री हरीश मियां जी , ये कार्यक्रम का संरक्षक श्री रणजीत सिंह धनाई जी, श्री पंकज सती जी, श्री सिद्धार्थ मियां, श्री लक्ष्मण सिंह,डांग क्षेत्र कि तमाम मातृशक्ति दगड़ा कतगै गणमान्य लोग उपस्थित छा।
भौत -भौत आभार अर धन्यवाद' व्यापार सभा, डांग -ऐंठाणा' का अध्यक्ष श्री सौरभ पाण्डेय जी अर वूंकी सैर्या टीम कु जौंन ये आयोजन तैं सुफल बणौण मा क्वी बि कोर -कसर नि छोड़ी अर डांग मा पैलि बार वृहद रूप मा होली मिलन समारोह कु आयोजन करि।

' फुल संग्राद अर होळि कि हार्दिक शुभकामना।'
संदीप रावत
अध्यक्ष :आखर चैरिटेबल ट्रस्ट
श्रीनगर गढ़वाल।

Monday, February 21, 2022

'आखर चैरिटेबल ट्रस्ट ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस ' ©संदीप रावत, न्यू डांग, श्रीनगर गढ़वाल।

'आखर चैरिटेबल ट्रस्ट ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस '
              
श्रीनगर गढ़वाल (21 फरवरी 2022)- गढ़वाली भाषा -साहित्य के संरक्षण एवं सम्बर्धन हेतु प्रयासरत 'आखर चैरिटेबल ट्रस्ट' ने 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर ट्रस्ट के कार्यालय रावत, न्यू  डांग में कार्यक्रम आयोजित किया । इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि -हमारी मातृभाषा ही हमारी पहचान है । मातृभाषा के पक्ष में विचार रखते हुए रचनाकारों /वक़्ताओं ने गढ़वाली भाषा को बढ़ावा देने, नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा से जोड़ने एवं इस भाषा के संरक्षण पर जोर दिया।
      आखर ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं कवयित्री अंशी कमल द्वारा गढ़वाली सरस्वती वंदना से हुई। कार्यक्रम में साहित्यकार एवं शिक्षाविद डॉ.अशोक बडोनी कहा कि - गढ़वाली भाषा के जो शब्द प्रचलन से बाहर हो रहे हैं उनको संरक्षित करने की आवश्यकता है।प्रत्येक को अपनी मातृभाषा के विकास व संरक्षण हेतु आगे आना ही होगा।'
      ट्रस्ट के उपाध्यक्ष एवं हे. न. ब. ग. विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रो. नागेंद्र रावत ने कहा कि -'अपनी मातृभाषा के प्रति हमें अपने दायित्वों को समझना होगा।एकल परिवार होने के कारण, दादा -दादी, नाना -नानी आदि के साथ नई पीढ़ी के न रह पाने के कारण भी आज अपनी मातृभाषा के प्रति हम सभी के दायित्व और भी बढ़ गए हैं । इस दिवस को मनाने का कारण यह है कि -कहीं ना कहीं आमजन अपनी दुधबोली से दूर हो रहा है।
       ट्रस्ट की कोषाध्यक्ष एवं कवयित्री रेखा चमोली ने कहा कि - " हमें मातृभाषा बचाने की पहल अपने घर से करनी होगी।हमारी मातृभाषा ही हमारी असली पहचान है । " योगा तृतीय सेमिस्टर की छात्रा श्वेता पंवार ने कहा कि - " हमें अपनी मातृभाषा में बात करते हुए शर्म महसूस नहीं होनी चाहिए एवं स्वयं ही बेझिझक होकर अपने से इसकी शुरुआत करनी चाहिए।अपनी मातृभाषा के संरक्षण एवं सम्बर्धन हेतु । "
      कार्यक्रम का संचालन करते हुए ट्रस्ट के अध्यक्ष संदीप रावत ने गढ़वाली भाषा की शब्द सामर्थ्य पर विचार रखे एवं कहा कि - अभिव्यक्ति की एक सशक्त माध्यम गढ़वाली भाषा के संरक्षण एवं सम्बर्धन की जिम्मेदारी हम सभी की बनती है। साथ ही संदीप रावत ने कहा कि - भाषाओं एवं बोलियों पर वैश्विक संकट को देखते हुए यूनेस्को ने वर्ष 2000 से प्रत्येक वर्ष 21फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने का निर्णय लिया था। मूल रूप में यह दिवस सारे विश्व में भाषा के पहले आंदोलन जो कि ढाका में बांग्ला भाषा के लिए हुआ था उसमें कई लोग शहीद हुए थे, तो उनकी याद में भी तब से यह दिवस मनाया जा रहा है। हम सभी को अपने दैनिक जीवन में इसे व्यवहार में लाना होगा।'
      इस अवसर पर कु.कंचन पंवार,अंशी कमल, रेखा चमोली आदि ने अपनी गढ़वाली रचनाएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम में संजय रावत,मयंक पंवार, संगीता पंवार आदि भी उपस्थित थे। अंत में ट्रस्ट की मुख्य ट्रस्टी श्रीमती लक्ष्मी रावत ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।