मेरी प्रकाशित पुस्तकें :-
Wednesday, December 23, 2020
"गढ़वाळि भाषा अर साहित्य की विकास जात्रा "एक उपादेय ग्रन्थ समीक्षक-- * डाॅ0 अचलानन्द जखमोला* (विन्सर पब्लिकेशन, देहरादून से वर्ष -2014 में प्रकाशित पुस्तक )
Tuesday, December 22, 2020
"मूर्धन्य लोक साहित्यकार डॉ. गोविन्द चातक जी कि जयन्ती(19 दिसंबर 2020) परैं वूं तै आखर समिति द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित " ------ संदीप रावत, न्यू डांग, श्रीनगर गढ़वाल
Friday, December 18, 2020
" गढ़वाली लोक साहित्य के पहले संग्रहकर्ता एवं अनुवादक थे मूर्धन्य लोक साहित्यकार डॉ. गोविन्द चातक जी " ---- संदीप रावत, न्यू डांग, श्रीनगर गढ़वाल।
" गढ़वाली लोक साहित्य के पहले संग्रहकर्ता एवं अनुवादक थे मूर्धन्य लोक साहित्यकार डॉ. गोविन्द चातक जी " ---- संदीप रावत
मूर्धन्य लोक साहित्यकार डाॅ. गोविंद चातक जी का जन्म 19 दिसम्बर, 1933 को ग्राम-सरकासैंणी (निकट - मोलधार ) पट्टी- लोस्तु -बडियारगढ़ , टिहरी गढ़वाल में हुआ था। इनके पिताजी स्व. धाम सिंह कंडारी जी स्कूल में अध्यापक थे एवं माता जी स्व. चंद्रा देवी जी ग्रहणी थीं। आछरीखुंट से दर्जा 4 पास करने के बाद वे पिता के साथ मसूरी आ गये। बचपन से ही वे लिखने-पढ़ने में बहुत अच्छे थे। 4-5 दिन पैदल मार्ग से वे मसूरी आये थे और दर्जा 6 में उनका एडमिशन हुआ और घनानंद इंटर कालेज, मसूरी से इंटरमीडिएट किया। घनानंद इंटर कालेज, मसूरी में डॉ.चातक जी को उनके शिक्षक,प्रसिद्ध लेखक शंभु प्रसाद बहुगुणा जी ने उनकी साहित्यिक अभिरुचि को आगे बढ़ाने में बहुत योगदान दिया।
डॉ.गोविन्द सिंह कंडारी जी ने अपना नाम "गोविन्द चातक " रखा । ‘चातक पक्षी’ की तरह उनमें साहित्य सजृन की ‘प्यास’ सदैव रही। किशोरावस्था से ही उनकी कविताएं व कहानी विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में छपने लगीं थी। घनानंद इंटर कालेज, मसूरी से इंटरमीडिएट करने के उपरांत स्नातक की पढ़ाई इलाहबाद विश्वविद्यालय से की। इलाहबाद में उनका संपर्क मोहन उप्रेती जी, बृजेन्द्रलाल शाह, रमा प्रसाद घील्डीयाल 'पहाड़ी ', भजन सिंह 'सिंह ', केशव धुलिया, इलाचंद्र जोशी आदि प्रतिभाओं से हुआ।
डाॅ. गोविन्द चातक जी ने MA आगरा विश्वविद्यालय से किया। फिर " गढ़वाली की उपबोलियां व उसके लोकगीत " विषय पर आगरा विश्वविद्यालय से ही Ph.D की और लोक साहित्य में D.Lit.की उपाधि प्राप्त की। दिल्ली में All India Radio (Drama Section ) में
नौकरी करने के पश्चात् "Rajdhani College, Dehli " में हिंदी के प्राध्यापक बने और रीड़र के पद से सेवानिवृत्त हुए। 9 जून, 2007 को उनका देहान्त हुआ ।
डाॅ. गोविन्द चातक जी की 25 किताबें प्रकाशित हुईं । वर्ष 1955
डाॅ. गोविन्द चातक जी ने गाँव -गाँव जाकर लोक साहित्य का संग्रह किया। असाधारण प्रतिभा के बावजूद वे सामान्य रूप से और बिल्कुल साधारण रूप से आम लोगों /गाँव के लोगों से मिलते थे, उनके बीच रहते थे। उन्होंने लोकसाहित्य पर माइक्रो लेवल पर सोचा और काम किया।
डॉ. गोविन्द चातक जी दिल्ली जैसी महानगरीय जिन्दगी को छोड़कर वापस गढ़वाल में ही रहना चाहते थे। गढ़वाल विश्वविद्यालय के शुरुआती समय में वे "हिंदी विभाग" में आना चाहते थे, परन्तु ऐसा हो नहीं पाया। दिल्ली विश्वविद्यालय से अवकाशप्राप्त होने के बाद डॉ. चातक जी ने श्रीकोट, श्रीनगर (गढ़वाल) में निवास हेतु 'देवधाम कुटी' बनाई। परन्तु उन्हें पुनः उन्हें दिल्ली में ही रहना पड़ा।
गढ़वाली लोक साहित्य के पहिले संग्रहकर्ता एवं अनुवादक लोक साहित्य अर संस्कृति के गम्भीर अध्येता -शोधार्थी , हिंदी के सुप्रसिद्ध नाट्यालोचक , नाटककार स्व. डॉ गोविन्द चातक जी को उनकी जयन्ती के सुअवसर पर सादर श्रद्धा सुमन अर्पित। 🙏🙏🙏
संदीप रावत
अध्यक्ष - आखर समिति
श्रीनगर गढ़वाल।
Wednesday, December 16, 2020
गढ़वाली साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर एवं शिक्षक महेशानन्द जी (पौड़ी ) द्वारा " गढ़वाळि भाषा अर साहित्य कि विकास जात्रा " की समीक्षा..
Monday, December 14, 2020
"वरिष्ठ एवं सुप्रसिद्ध गढ़वाली साहित्यकार श्री ललित केशवान जी को दिया जाएगा " डॉ.गोविन्द चातक स्मृति आखर साहित्य सम्मान- वर्ष 2020" ----- संदीप रावत, श्रीनगर गढ़वाल।
सर्व विदित है कि "आखर "समिति,श्रीनगर गढ़वाल द्वारा वर्ष 19 दिसम्बर 2017 से गढ़वाली भाषा व लोकसाहित्य के मूर्धन्य साहित्यकार डॉ. गोविन्द चातक जी की स्मृति में उनकी जयन्ती पर एक सफल विचार गोष्ठी और परिचर्चा का आयोजन शुरू किया गया था। सभी भाषा एवं साहित्य प्रेमीजनों की शुभकामनों से गढ़वाली लोक साहित्य व भाषा के क्षेत्र में स्व.डॉ.गोविन्द चातक जी के भगीरथ योगदान से प्रेरणा लेकर वर्ष 2018 से गोविन्द चातक जयन्ती के सुअवसर पर "आखर "समिति ,श्रीनगर गढ़वाल द्वारा डॉ.गोविन्द चातक स्मृति व्याख्यान आयोजन के साथ -साथ चातक परिवार के सहयोग से "डॉ.गोविन्द चातक स्मृति आखर साहित्य सम्मान " शुरू किया गया । इसमें सम्मान स्वरूप - रुपए ग्यारह हजार (11,000/ )की नगद राशि के साथ अंग वस्त्र , मानपत्र व आखर स्मृति चिन्ह भेंट किया जाता है । गढ़वाली भाषा - साहित्य में अपना अमूल्य योगदान देने हेतु इस वर्ष का यह सम्मान अर्थात "डॉ. गोविन्द चातक स्मृति आखर साहित्य सम्मान- वर्ष 2020" मंडावाली दिल्ली निवासी प्रख्यात वरिष्ठ गढ़वाली साहित्यकार, हास्य -व्यंग्य के सुप्रसिद्ध गढ़वाली कवि श्रद्धेय श्री ललित केशवान जी को दिया जाएगा। पूर्व मे यह सम्मान वर्ष 2018 मे डॉ. नंदकिशोर ढौंढियाल "अरुण " जी को और वर्ष 2019 मे स्व. मोहन लाल नेगी जी एवं स्व. बचन सिंह नेगी जी को सयुंक्त रूप से दिया गया।
इस वर्ष के " आखर " सम्मान से सम्मानित होने वाले गढ़वाली साहित्यकार श्रद्धेय श्री ललित केशवान जी की गढ़वाली में 09 (नौ )पुस्तकें प्रकाशित हैं । हिन्दी में भी उनकी 10 (दस )पुस्तकें प्रकाशित हैं। दिल्ली में गढ़वाली काव्य गोष्ठीयों की शुरुआत करने में भी उनकी सक्रिय एवं महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
गढ़वाली साहित्यकार एवं हास्य - व्यंग्य के सुप्रसिद्ध कवि श्री ललित केशवान जी का जन्म 17 अगस्त 1939 को जिला पौड़ी गढ़वाल में अपने ननिहाल कांडा ( सितोनस्यूँ ) में हुआ एवं उनका गांव - सिरोली, (इडवालस्यूँ ),पौड़ी गढ़वाल में ही है। उनकी गढ़वाली में प्रकाशित पुस्तकें इस प्रकार से हैं -
(1) खिलदा फूल हैंसदा पात (हास्य कविता संग्रह )
(2) हरि हिंडवांण( गढ़वाली नाटक )
(3) दिख्यां दिन तप्यां घाम (गढ़वाली कविता संग्रह )
(4) सब मिलीक रौंला हम (गढ़वाली बाल कविता संग्रह)
(5)जब गरदिस मा गरदिस ऐना (गढ़वाली कविता संग्रह)
(6) दीवा ह्वेजा दैणी (गढ़वाली खण्डकाव्य )
(7) जै बद्री नारैण ( पाँच गढ़वाली एकांकी नाटक )
(8) गंगू रमोला (( गढ़वाली पौराणीक एकांकी नाटक)
(9) मिठास ( गढ़वाली कथा संग्रह )
कोविड -19 की परिस्थिति के कारण इस वर्ष 19 दिसंबर 2020 को डॉ. गोविन्द चातक जी की जयन्ती पर "आखर "समिति द्वारा श्रद्धांजलि स्वरूप सूक्ष्म कार्यक्रम तो होगा परन्तु "डॉ. गोविन्द चातक स्मृति व्याख्यान माला व सम्मान समारोह " आयोजित नहीं किया जा सकेगा। निकट भविष्य में थोड़ा स्थिति सामान्य होने पर उचित समय "आखर" द्वारा आयोजित समारोह /कार्यक्रम में इस वर्ष का "डॉ0 गोविन्द चातक स्मृति आखर साहित्य सम्मान- वर्ष 2020 " श्रद्धेय श्री ललित केशवान जी को दिया जाएगा।
Sunday, December 6, 2020
"साहित्य अकादमी " पुरस्कार से सम्मानित हिन्दी -गढ़वाळि का सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री प्रेम लाल भट्ट जी बि भग्यान ह्वे ग्येनि " - संदीप रावत, न्यू डांग, श्रीनगर गढ़वाल
प्रेम लाल भट्ट ( जन्म -08 मई 1931, सेमन, देवप्रयाग मा। भग्यान - 06 दिसम्बर 2020, दिल्ली मा )
हिन्दी - गढ़वाळि का सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री प्रेम लाल भट्ट जी को बि ब्याळी 06 दिसम्बर 2020 खुणी दिल्ली मा स्वर्गवास ह्वे ग्ये।
गढ़वाळि साहित्यकारों मा वूं को भौत बड़ो स्थान अर मान छ । वो उच्चकोटि का रचनाकार छायि । वूंन कम लेखीक बि गढ़वाळि भाषा मा अपणो अमूल्य योगदान दे । वूंन गढ़वाळि निबंध साहित्य अर गढ़वाळि काव्य तैं नयो ब्योंत दे। वूंन गढ़वाळि साहित्य तैं " उमाळ " ( सन 1979 मा प्रकाशित गढ़वाळि काव्य संग्रै ), "भागै लकीर "( सन 1987 मा प्रकाशित गढ़वाळि खण्ड काव्य ) अर " उत्तरायण "( सन 1987 मा प्रकाशित गढ़वाळि महाकाव्य ) जन अनमोल कृति गढ़वाळि साहित्य तैं देनि।
सन 2008 मा प्रेम लाल भट्ट जी स्व. सुदामा प्रसाद प्रेमी जी दगड़ा गढ़वाळि साहित्या वास्ता " साहित्य अकादमी " पुरस्कार से सम्मानित ह्वे छा।
" कैन बोलि या रिसी मुन्यूं की
द्यौ अर द्यब्तौं की धरती च
तुम्हीं बता क्या रूखा माटा मा फसल प्यार की उग सकणी च ?
जख भुम्याळ भूखा मौन्ना छन
मेघ तिस्वाळा ही घुमणा छन
रक्षपाल रक्षा का बाना
त्राहि त्राहि ही सब कन्ना छन
वख बल कबि द्यवता रहेंदा छा
बात क्या या तुम तैं खपणी च ?
तुम्हीं बता क्या रूखा माटा मा फसल प्यार की उग सकणी च ?
देव बाला छन भूखा पेट जू
घास का फंची सान्नी सन्नी छन
सोळ हाथ का पाठगौं से जू
ज्वान्नि कि ल्हास ल्हसोण्णी छन
एक मील से रिसि कन्या क्वी
डिब्लु पाणि कू ल्है सकणी च ?
तुम्हीं बता क्या रूखा माटा मा फसल प्यार की उग सकणी च ?"
भगवान वूं कि आत्मा तैं शांति दियां, अपणा श्री चरणों मा जगा दियां अर वूंकि सैर्या कुटुमदरि तैं ये दुख तैं सैणै सक्या दिंया। महान साहित्यकार " स्व.श्री प्रेमलाल भट्ट " जी तैं विनम्र श्रद्धांजलि। ॐ शान्ति
Saturday, December 5, 2020
"श्रीनगर गढ़वाल का गढ़वाळि साहित्यकार अर रंगकर्मी श्री राजीव कगड़ियाल जी को स्वर्गवास "
श्रीनगर : 05/12/2020: एक हौरि दुखद घटना -
"श्रीनगर गढ़वाल का गढ़वाळि साहित्यकार अर रंगकर्मी श्री राजीव कगड़ियाल जी को स्वर्गवास "
बड़ा दुखै बात च कि - श्रीनगर गढ़वाल का गढ़वाळि साहित्यकार अर रंगकर्मी श्री राजीव कगड़ियाल जी अगास ह्वे ग्येनि। यानि अब वु हमारा बीच नि रैनि। कुछ दिनों बटि वू कि तबियत खराब छै । परसि रात 03 दिसम्बर 2020 खुणी वूं को स्वर्गवास ह्वे ग्ये।
वु एक गढ़वाळी कवि होणा दगड़ा रंगकर्मी अर हास्य कलाकार बि छायि। वु यख यूनिवर्सिटी मा नौकरी करदा छा अर कतगै पिक्चरों मा वूंन हास्य कलाकारै रूप मा काम करी छौ। भग्यान राजीव कगड़ियाल जी का द्वी गढ़वाळि काव्य संग्रै "उमाळ " अर "कुतग्यळि " प्रकाशित छन।
सरल स्वभौ वळा अर हँसमुख राजीव कगड़ियाल जी कि याद सदानि आणी रालि।
भगवान वूं कि आत्मा तैं शांति दियां अर वूंकि सैर्या कुटुमदरि तैं ये दुख तैं सैणै सक्या दिंया। "आखर" समिति अर मेरी तर्फां बटि राजीव कगड़ियाल " रांकु "जी तैं विनम्र श्रद्धांजलि। ॐ शान्ति
संदीप रावत